Sanjeev Arora bail plea:पंजाब की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्य के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाले अरोड़ा को अब इस मामले में राहत नहीं मिली है, जिसके बाद उनके सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की संभावना जताई जा रही है।
गिरफ्तारी और रिमांड को दी थी चुनौती
Sanjeev Arora bail plea:कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने PMLA के तहत अपनी गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार और रिमांड के आदेशों को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया था कि उनकी गिरफ्तारी कानूनी सुरक्षा उपायों और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
अदालत को यह भी बताया गया कि गुरुग्राम स्थित PMLA के विशेष न्यायाधीश ने 15 जून को ही उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
संजीव अरोड़ा की ओर से कोर्ट में दिए गए मुख्य तर्क
Sanjeev Arora bail plea:अदालत में सुनवाई के दौरान मंत्री संजीव अरोड़ा के वकीलों ने उनका पक्ष रखते हुए कई प्रमुख दलीलें दीं:
- सार्वजनिक छवि और पद: अरोड़ा ने खुद को पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री और राज्यसभा का पूर्व सांसद बताते हुए कहा कि समाज में उनकी गहरी जड़ें हैं और उनका सार्वजनिक रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग रहा है।
- हिरासत का हवाला: उन्होंने कोर्ट को बताया कि वह बीते 9 मई से हिरासत में हैं।
- कंपनी से दूरी: याचिकाकर्ता ने खुद को ‘मैसर्स हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ (HSRL) का प्रमोटर और चेयरमैन बताया। हालांकि, वकीलों ने सफाई दी कि कैबिनेट मंत्री का पद संभालने के बाद उन्होंने कंपनी के दैनिक कामकाज में हिस्सा लेना बंद कर दिया था।
- अनुसूचित अपराध का अभाव: अरोड़ा के वकीलों का तर्क था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है कि कोई ऐसा ‘अनुसूचित अपराध’ हुआ है, जिससे कथित तौर पर अपराध की आय (Proceeds of Crime) उत्पन्न हुई हो और उसका सीधा संबंध याचिकाकर्ता से हो।
‘ईडी के पास नहीं है कोई ठोस सबूत’
Sanjeev Arora bail plea:याचिका में यह भी दावा किया गया कि जांच एजेंसी (ED) द्वारा उनके घर, उनके बेटे के आवास और HSRL के कार्यालय परिसरों में व्यापक स्तर पर तलाशी ली गई थी। इसके बावजूद जांच एजेंसी के हाथ कोई भी आपत्तिजनक दस्तावेज, बेहिसाब संपत्ति या डिजिटल साक्ष्य नहीं लगे, जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने किसी भी प्रकार का वित्तीय अपराध किया है या अपराध से जुड़ी आय को छुपाने और वैध बनाने में कोई भूमिका निभाई है।
फिलहाल हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब देखना यह होगा कि मंत्री संजीव अरोड़ा सुप्रीम कोर्ट में किस प्रकार कानूनी लड़ਾਈ आगे बढ़ाते हैं।

