रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
UPI MDR : आगामी त्योहारों के सीजन में देश के लाखों छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए राहत भरी खबर आई है। यूपीआई (UPI) लेनदेन पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की समय सीमा को बढ़ा दिया गया है। पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की योजना थी, जिसे अब दीवाली के बाद तक के लिए टाल दिया गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और संबंधित एजेंसियों द्वारा लिए गए इस फैसले से फेस्टिव सीजन में दुकानदारों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ से मुक्ति मिलेगी और डिजिटल लेनदेन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
क्या है UPI MDR नियम और शुल्क का गणित?
UPI MDR सरकार और वित्तीय संस्थाओं द्वारा तय किए गए नए नियमों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के यूपीआई डिजिटल लेनदेन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने का प्रस्ताव रखा गया है। यह शुल्क आम ग्राहकों से नहीं, बल्कि भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों (Merchants) से लिया जाएगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पेमेंट गेटवे कंपनियों और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के राजस्व मॉडल को मजबूत करना है। हालांकि, लागू होने की तिथि आगे बढ़ने से फिनटेक कंपनियों के शेयरों पर तात्कालिक असर देखा गया है, जबकि व्यापारियों को सीधा फायदा हुआ है।
फेस्टिव सीजन के कारण टली लागू करने की तारीख
UPI MDR बाजार में पिछले कई दिनों से इस बात की चर्चाएं थीं कि त्योहारी सीजन को देखते हुए व्यापारी वर्ग इस नियम को लागू करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय की मांग कर रहा था। व्यापारियों की मांग और त्योहारों के दौरान बाजार में बिक्री की रफ्तार बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने इसे 15 अक्टूबर की बजाय दीवाली के बाद लागू करने का निर्णय लिया है। इससे दीवाली तक मर्चेंट्स को यूपीआई भुगतान पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा, जिससे उनका मुनाफा सुरक्षित रहेगा।
आसान शब्दों में समझें क्या होता है MDR?
UPI MDR मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह सेवा शुल्क है जो किसी व्यापारी को डिजिटल पेमेंट (जैसे UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड) के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने पर बैंक, पेमेंट गेटवे या पेमेंट ऐप कंपनियों को देना पड़ता है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि MDR का बोझ सीधे तौर पर सामान खरीदने वाले ग्राहक पर नहीं पड़ता, बल्कि यह दुकानदार द्वारा पेमेंट प्रोसेसिंग सुविधा के बदले भुगतान की जाने वाली फीस है।

