By: Ravindra Singh
Shardiya Navratri : शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू हो रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस पर्व के पहले दिन कलश स्थापना या घट स्थापना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से कलश स्थापित करके देवी मां का आह्वान किया जाता है।
कलश स्थापना करते समय पूजा स्थल की दिशा, कलश में जल भरने, जौ रखने और नारियल स्थापित करने जैसी बातों का ध्यान रखा जाता है। इसके साथ ही नवार्ण मंत्र का जाप भी किया जाता है। आइए जानते हैं नवरात्रि में कलश स्थापना की पूरी विधि, आवश्यक सामग्री और इससे जुड़े महत्वपूर्ण नियम।
शारदीय नवरात्रि 2026 कब से कब तक है?
Shardiya Navratri साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है और इसका समापन 19 अक्टूबर को होगा। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घट स्थापना की जाती है। भक्त इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्री
Shardiya Navratri नवरात्रि में घट स्थापना करने से पहले पूजा की आवश्यक सामग्री एक जगह एकत्र कर लें। इसके लिए आप इन चीजों की व्यवस्था कर सकते हैं:
- मिट्टी या धातु का साफ कलश
- शुद्ध जल और संभव हो तो गंगाजल
- जौ और साफ मिट्टी या बालू
- एक सिक्का
- कलावा या मौली
- मिट्टी की कटोरी
- जटा वाला नारियल
- लाल कपड़ा
- चावल या जौ
- पूजा के लिए फूल और अन्य आवश्यक सामग्री
कलश स्थापना की सही विधि
1. उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा स्थल तैयार करें
Shardiya Navratri सबसे पहले घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में मौजूद स्थान को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद वहां जल छिड़ककर पूजा के लिए जगह तैयार करें। साफ मिट्टी या बालू की एक परत बिछाएं और उस पर जौ फैलाएं। फिर उसके ऊपर मिट्टी या बालू की दूसरी परत डालकर थोड़ा पानी छिड़क दें।
2. कलश में जल भरकर स्थापित करें
Shardiya Navratri अब साफ मिट्टी या धातु के कलश को शुद्ध जल से भरें। परंपरा के अनुसार, इसमें एक सिक्का डाल सकते हैं। यदि उपलब्ध हो तो जल में थोड़ा गंगाजल या पवित्र नदी का जल भी मिलाएं।
इसके बाद कलश के मुख पर दाहिना हाथ रखकर पवित्र नदियों का आह्वान करने वाला मंत्र पढ़ें।
मंत्र:
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
इस मंत्र के माध्यम से गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी नदियों का स्मरण किया जाता है। इसके साथ वरुण देव का भी आह्वान करने की परंपरा है।
3. कलश के मुख पर कलावा बांधें
Shardiya Navratri कलश स्थापित करने के बाद उसके मुख पर कलावा या मौली बांधें। इसके ऊपर एक साफ मिट्टी की कटोरी रखें। कटोरी में जौ भरें। जौ उपलब्ध न होने पर परंपरा के अनुसार चावल का उपयोग भी किया जा सकता है।
4. लाल कपड़े में लपेटकर नारियल स्थापित करें
Shardiya Navratri अब जटा वाले नारियल को लाल कपड़े में लपेटें और कलावे से बांध दें। इसके बाद नारियल को जौ या चावल से भरी कटोरी के ऊपर स्थापित करें। इस तरह कलश स्थापना की मुख्य प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
कलश के ऊपर दीपक जलाना चाहिए या नहीं?
Shardiya Navratri कलश स्थापना के दौरान दीपक रखने की जगह को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहता है। प्रचलित पूजा पद्धति के अनुसार, कलश के ऊपर रखी कटोरी में दीपक जलाने से बचना चाहिए। दीपक के लिए पूजा स्थल में अलग और सुरक्षित स्थान निर्धारित करें।
कुछ परंपराओं में दीपक को आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, पूजा की स्थानीय परंपरा और परिवार में प्रचलित विधि का भी ध्यान रखें।
कलश के ऊपर शंख रखने का नियम
Shardiya Navratri कुछ भक्त कलश के ऊपर रखी कटोरी में चावल भरकर उसके ऊपर शंख स्थापित करते हैं। संबंधित पूजा परंपरा में इसे स्वीकार किया जाता है। शंख रखने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह साफ हो और स्थिर तरीके से रखा गया हो। शंख की दिशा और स्थिति के संबंध में अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित के निर्देशों का पालन करें।
नवरात्रि में नवार्ण मंत्र का महत्व
Shardiya Navratri कलश स्थापना के दौरान मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इस मंत्र का उच्चारण पूजा की अलग-अलग प्रक्रियाओं के दौरान किया जा सकता है।
नवार्ण मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
यह मंत्र देवी चामुंडा की आराधना से जुड़ा है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इसका जाप कर सकते हैं।
मंत्र के साथ ऐसे करें कलश स्थापना
Shardiya Navratri कलश स्थापना करते समय नवार्ण मंत्र का जाप निम्नलिखित क्रम में किया जा सकता है:
- पूजा स्थल की सफाई करते समय मंत्र का जाप करें।
- मिट्टी या बालू बिछाते समय पांच बार मंत्र पढ़ें।
- मिट्टी के ऊपर जौ फैलाते समय मंत्र का उच्चारण करें।
- जौ के ऊपर मिट्टी या बालू की दूसरी परत बिछाएं और मंत्र पढ़ें।
- तैयार स्थान पर कलश स्थापित करते समय मंत्र का जाप करें।
- कलश में जल भरते समय मंत्र पढ़ें।
- कलश में सिक्का डालते हुए मंत्र का उच्चारण करें।
- वरुण देव का आह्वान करते समय मंत्र पढ़ें।
- कलश के मुख पर कलावा बांधते हुए मंत्र का जाप करें।
- कलश के ऊपर कटोरी रखकर मंत्र पढ़ें।
- कटोरी में जौ या चावल भरते समय मंत्र का उच्चारण करें।
- नारियल को लाल कपड़े में लपेटते हुए मंत्र पढ़ें।
- नारियल को कलावे से बांधते समय मंत्र का जाप करें।
- अंत में नारियल को कटोरी के ऊपर स्थापित करके मां दुर्गा का ध्यान करें।
इस प्रकार श्रद्धा और विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
नवरात्रि में पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखें।
- कलश स्थापना के लिए स्थिर और सुरक्षित जगह चुनें।
- नारियल और कलश को सावधानी से स्थापित करें, ताकि वे गिरें नहीं।
- दीपक को ज्वलनशील वस्तुओं और पूजा सामग्री से सुरक्षित दूरी पर रखें।
- मंत्रों का उच्चारण श्रद्धापूर्वक करें। मंत्र याद न होने पर देवी मां का मन से स्मरण भी कर सकते हैं।
- पूजा की विधि में परिवार की परंपराओं और स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करें।
निष्कर्ष: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना को पूजा का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। सही तैयारी, स्वच्छता, मंत्र जाप और श्रद्धा के साथ घट स्थापना करके मां दुर्गा की आराधना करें।
11 अक्टूबर 2026 राशिफल: नवरात्रि के पहले दिन इन राशियों को मिलेगा लाभ

