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रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर

Supaul : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के पावन अवसर पर शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के बैनर तले सिविल कोर्ट परिसर तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष राजेश कुमार बच्चन के दिशानिर्देश पर संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य ध्येय न्यायालय परिसर में स्वच्छता सुनिश्चित करने के साथ-साथ न्यायिक कर्मियों एवं आमजन के मध्य साफ-सफाई के प्रति चेतना जागृत करना था।

प्रधान जिला जज के नेतृत्व में न्यायिक अधिकारियों ने किया श्रमदान

Supaul स्वच्छता अभियान की कमान स्वयं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार बच्चन ने संभाली। उन्होंने अन्य न्यायिक अधिकारियों और अदालत के कर्मचारियों के साथ मिलकर झाड़ू लगाई और श्रमदान का संदेश दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बापू के स्वच्छता संबंधी विचार आज भी हमारे समाज के लिए मार्गदर्शक हैं और एक स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण हेतु हर नागरिक को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।

अभियान में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामचन्द्र प्रसाद, प्राधिकार के सचिव अमित गौरव, मुंसिफ सुदीप पाण्डेय, न्यायिक दंडाधिकारी प्रकाश आनंद व अमन कुमार, प्रधान लिपिक दिनेश जायसवाल तथा नाजिर सर्वेश झा सहित कई कर्मियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

परिसर की सफाई के साथ कचरा प्रबंधन और जन-जागरूकता

Supaul अभियान के दौरान सिविल कोर्ट परिसर के कोने-कोने और निकटवर्ती स्थानों की मुस्तैदी से सफाई की गई। एकत्र किए गए कचरे को निस्तारण हेतु निर्धारित स्थलों तक पहुंचाया गया। अदालत में आने वाले फरियादियों और आम लोगों को भी परिसर स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों को साफ-सुथरा रखना केवल सफाईकर्मियों या प्रशासन का काम नहीं है, बल्कि इसमें जन-भागीदारी अनिवार्य है।

महती भूमिका निभाने वाले सफाईकर्मियों का हुआ नागरिक अभिनंदन

Supaul सफाई अभियान के समापन के उपरांत जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा कोर्ट परिसर को दिन-रात स्वच्छ रखने वाले सफाईकर्मियों के सम्मान में एक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। प्रधान जिला जज राजेश कुमार बच्चन ने सफाईकर्मियों को सम्मानित करते हुए कहा कि उनके निष्ठापूर्ण श्रम के कारण ही जजों, वकीलों, कर्मचारियों और आम फरियादियों को स्वच्छ वातावरण प्राप्त होता है।

प्राधिकार के सचिव अमित गौरव ने कहा कि स्वच्छता केवल एक दिन का औपचारिक कार्यक्रम न होकर निरंतर चलने वाली जीवनशैली है। अंत में सभी न्यायिक अधिकारियों व कर्मियों ने स्वच्छता को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प लिया।

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