Bastar Pandum Festival Controversy:छत्तीसगढ़ की राजनीति में हाल ही में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इस आयोजन में 6.14 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च करने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इसे जनता के पैसों की बर्बादी करार दिया है, जबकि राज्य सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यदि कोई ठोस शिकायत मिलती है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
कांग्रेस का बड़ा हमला: फिजूलखर्ची का लगाया आरोप
Bastar Pandum Festival Controversy:कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि इस तीन दिवसीय भव्य आयोजन में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए आरोप लगाया कि:
- फूलों की सजावट पर करीब 28 लाख रुपये खर्च किए गए।
- केवल ग्रीन रूम तैयार करने के नाम पर 42 लाख रुपये उड़ाए गए।
- कपड़े की साइड वॉल पर 44 लाख रुपये, कालीन पर 33 लाख रुपये और कुर्सी-टेबल पर 12.5 लाख रुपये खर्च हुए।
- इसके अलावा, एक दिन के कलात्मक इंस्टॉलेशन पर 16.84 लाख रुपये और राष्ट्रपति के स्वागत क्षेत्र पर 17.5 लाख रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस राशि का इस्तेमाल बस्तर के विकास, आजीविका के साधनों या बरसात में टूटी सड़कों और पुल-पुलिया की मरम्मत के लिए किया जा सकता था।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव का पलटवार
Bastar Pandum Festival Controversy:कांग्रेस के इन तमाम आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव ने इसे पूरी तरह राजनीतिक बयानबाजी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘बस्तर पंडुम’ का मुख्य उद्देश्य बस्तर की अनूठी संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था।
अनियमितता के सवालों पर डिप्टी सीएम ने कहा कि यदि इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो सरकार उसकी जांच जरूर करवाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारी प्रोजेक्ट्स के सभी बिलों की प्रक्रिया के तहत कई स्तरों पर जांच होती है, जिसके बाद ही भुगतान की अनुमति मिलती है।
पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई और आयोजन की पृष्ठभूमि
Bastar Pandum Festival Controversy:इस पूरे विवाद के बीच, जगदलपुर के पीडब्ल्यूडी (PWD) कार्यपालन अभियंता भावेश सिंह ने जानकारी दी कि कार्यक्रम से जुड़े एक ठेकेदार के बिल का अभी केवल 70 प्रतिशत भुगतान ही किया गया है, जबकि शेष 30 प्रतिशत भुगतान रोक दिया गया है। हालांकि, यह रोक अनियमितता के संदेह की वजह से लगाई गई है या किसी अन्य कारण से, इस पर उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि बस्तर संभाग की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों और लोकशिल्प को बढ़ावा देने के लिए इस तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन 7 से 9 फरवरी के दौरान जगदलपुर में किया गया था। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का शुभारंभ देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था, जबकि इसका समापन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ था।

