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CM Yogi:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में एक श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए अयोध्या के राम मंदिर निर्माण और देश में चल रहे सांस्कृतिक विकास को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने समाज से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम और गलत सूचनाओं से पूरी तरह सावधान रहें। ग्वालियर के परिप्रेक्ष्य में भी धार्मिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की चर्चा इन दिनों तेजी से हो रही है, जहां सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर लोग खासे जागरूक नजर आ रहे हैं।

अयोध्या का बदलता स्वरूप और विरोधियों पर निशाना

CM Yogi:मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि यह एक लंबे और कड़े संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या, काशी विश्वनाथ धाम और विंध्याचल धाम का कायाकल्प हो चुका है, जिससे देश में एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अयोध्या के इस बदलते और भव्य रूप से वे लोग असहज महसूस कर रहे हैं, जो हमेशा से भगवान राम के विरोधी रहे हैं। ग्वालियर और देश के अन्य हिस्सों में भी इस सांस्कृतिक बदलाव को लेकर सकारात्मक चर्चाएं हो रही हैं।

कालनेमि का उदाहरण देकर चेताया

CM Yogi:कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने रामायण के पात्र ‘कालनेमि’ का जिक्र करते हुए जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भी समाज को गुमराह करने और भ्रम फैलाने वाली ताकतों की कोई कमी नहीं है। सनातन धर्म के अनुयायियों को ऐसी ताकतों से पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए, जो गलत प्रचार के जरिए समाज को तोड़ने की कोशिश करती हैं।

एकजुटता ही देश की सबसे बड़ी ताकत

CM Yogi:मुख्यमंत्री ने देश की 140 करोड़ से अधिक आबादी की एकता पर जोर देते हुए कहा कि जब समाज एकजुट होकर आगे बढ़ता है, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को चरितार्थ करने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर काम करने की जरूरत है। यदि भारत के सभी लोग एक दिशा में प्रयास करें, तो देश की प्रगति को कोई नहीं रोक सकता।

महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवैद्यनाथ को श्रद्धांजलि

CM Yogi:यह पूरा संबोधन गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवैद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान दिया गया। इस अवसर पर सीएम योगी ने शिक्षा, समाज सुधार और संस्कृति के क्षेत्र में दोनों संतों के अमूल्य योगदान को याद किया और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के कार्यों का भी उल्लेख किया।

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