By: Ravindra Singh
MP Weather : मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है। सितंबर के आखिरी दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश में हुई बारिश के कारण प्रदेश में इस मानसून सीजन की कुल औसत बारिश बढ़कर करीब 35.6 इंच हो गई है। यह सामान्य बारिश के निर्धारित आंकड़े का 95.4 प्रतिशत है। हालांकि, प्रदेश अभी सामान्य बारिश की श्रेणी तक नहीं पहुंचा है। मौसम विभाग के अनुसार 96 से 104 प्रतिशत बारिश को सामान्य माना जाता है।
25 जिलों में पूरा हुआ बारिश का कोटा
MP Weather प्रदेश के 25 जिलों में अब तक 100 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।
वहीं नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, अशोकनगर, दमोह, मंदसौर और मुरैना में बारिश 90 से 99 प्रतिशत के बीच दर्ज हुई है। इन जिलों को सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी और वर्षा की जरूरत है।
इन जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
MP Weather इस सीजन अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। इसके अलावा आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में भी औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
मऊगंज, सतना और उमरिया इस सीजन सबसे ज्यादा बारिश वाले जिलों में शामिल हैं। यहां बारिश का कुल आंकड़ा करीब 50 इंच तक पहुंच गया है।
मानसून सीजन खत्म होने में सिर्फ चार दिन
MP Weather मध्य प्रदेश में आधिकारिक मानसूनी अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक रहती है। ऐसे में अब सीजन समाप्त होने में केवल चार दिन शेष हैं। जिन जिलों में बारिश का कोटा अभी पूरा नहीं हुआ है, वहां सामान्य आंकड़े तक पहुंचने की संभावना सितंबर के बचे दिनों में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी।
अक्टूबर में होने वाली बारिश को आधिकारिक मानसून सीजन के आंकड़े में शामिल नहीं किया जाता। इसलिए इस साल की अंतिम मानसूनी स्थिति सितंबर के आखिरी दिनों में होने वाली बारिश से ही तय होगी।
इंदौर संभाग में बारिश की कमी
MP Weather प्रदेश के कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने के बावजूद कुछ क्षेत्र अभी भी औसत आंकड़े से पीछे हैं। इंदौर संभाग बारिश के मामले में सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शामिल है। कई अन्य जिलों में भी सामान्य बारिश का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है।
सितंबर के आखिरी दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश में हुई बारिश ने प्रदेश के कुल बारिश के आंकड़े को जरूर बेहतर किया है। अब मानसून की विदाई से पहले होने वाली बारिश यह तय करेगी कि प्रदेश इस सीजन सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंच पाता है या नहीं।
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