रिपोर्टर: अरविन्द सिंह
Bhopal : मध्य प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कौशल आधारित व्यावसायिक शिक्षा दे रहे लगभग 6 हजार वोकेशनल ट्रेनर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नवीन व्यावसायिक शिक्षा प्रशिक्षक संघ ने शिक्षा अधिकारियों और विभाग के साथ सीधे पत्राचार पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल हटाने की मांग की है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र संवाद स्थापित कर समाधान नहीं निकाला गया, तो प्रदेश भर के ट्रेनर्स उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

10 वर्षों से स्थिर मानदेय और अन्य राज्यों से असमानता का आरोप
Bhopal नवीन व्यावसायिक शिक्षा प्रशिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश परमार के अनुसार, वर्ष 2014-15 से ट्रेनर्स राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को हुनरमंद बनाने का कार्य कर रहे हैं। संघ का आरोप है कि बीते एक दशक से ट्रेनर्स का मासिक मानदेय 20,000 रुपये पर ही अटका हुआ है, जबकि दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में वोकेशनल ट्रेनर्स को 38,600 रुपये मासिक वेतन और नियमित वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ दिया जा रहा है। संघ ने समग्र शिक्षा मैन्युअल-2024 के प्रावधानों का हवाला देते हुए राज्यांश के माध्यम से अतिरिक्त मानदेय स्वीकृत करने की मांग उठाई है।
स्वीकृत बजट के बावजूद कटौती और सीएल बंद होने से रोष
Bhopal नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ (NVETA) ने जानकारी दी कि प्रदेश के 2,627 स्कूलों में तैनात 5,254 वोकेशनल ट्रेनर्स के वेतन मद में केंद्र सरकार द्वारा 157.62 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया जा चुका है। इसके बावजूद ट्रेनर्स को इसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है। आरोप है कि आउटसोर्स एजेंसियों (VTPs) को दिए जाने वाले 10 प्रतिशत कमीशन की कटौती ट्रेनर्स के मूल मानदेय से की जा रही है। इसके अतिरिक्त, मातृत्व व मेडिकल अवकाश में आ रही दिक्कतों के साथ-साथ दिसंबर 2025 से प्रति माह मिलने वाली आकस्मिक छुट्टी (CL) की सुविधा भी बंद कर दी गई है।
सीधे संवाद पर रोक से बढ़ा असंतोष, आंदोलन की चेतावनी
Bhopal ट्रेनर्स का कहना है कि उनकी कार्यप्रणाली, उपस्थिति और मूल्यांकन की शर्तें लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) व समग्र शिक्षा विभाग तय करते हैं, परंतु उनके वेतन का जिम्मा आउटसोर्स एजेंसियों के पास है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे पत्राचार और संवाद पर रोक लगाए जाने से ट्रेनर्स में भारी असंतोष व्याप्त है। संघ ने मांग की है कि इस प्रतिबंधात्मक आदेश को तुरंत वापस लिया जाए और बातचीत के जरिए समस्याओं का निवारण हो, अन्यथा होने वाले राज्यव्यापी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और समग्र शिक्षा विभाग की होगी।
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