Supreme Court Jantar Mantar Committee:सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्मामले में बनाई गई हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) में बदलाव करने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बिना किसी ठोस आधार के सिर्फ धारणा या अनुमान के तहत कमेटी पर सवाल उठाना जल्दबाजी होगी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कमेटी को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से अपनी जांच आगे बढ़ाने के कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
जांच के मुख्य बिंदु और निर्देश
- Supreme Court Jantar Mantar Committee:विशिष्ट मामलों की जांच: कोर्ट ने HPEC को निर्देश दिया है कि वह प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर निशाना बनाने और उनके साथ दुर्व्यवहार, अत्यधिक हिंसा तथा दोनों पक्षों द्वारा संपत्तियों को पहुंचाए गए नुकसान की गहराई से जांच करे।
- गवाहों की सुरक्षा और गोपनीयता: संवेदनशील और कमजोर गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी पहचान, बयान और सबूतों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। इसके लिए एक सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल बनाने का भी सुझाव दिया गया है।
- कानूनी सहायता: अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और AOR सी. सोलोमन को एमिकस क्यूरी (Amici Curiae) नियुक्त किया है, जो कोर्ट की सहायता करने के साथ-साथ HPEC के प्रतिनिधि और स्वतंत्र मध्यस्थ के तौर पर काम करेंगे।
- सदस्य सचिव की नियुक्ति: प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कमेटी को जल्द से जल्द एक मेंबर सेक्रेटरी नियुक्त करने को कहा गया है।
14 वर्षीय किशोरी को सुरक्षा देने के आदेश
Supreme Court Jantar Mantar Committee:सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक 14 साल की लड़की और उसके परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। याचिका में बताया गया था कि प्रदर्शन से जुड़ी इस नाबालिग को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को खतरे का आकलन कर तुरंत सुरक्षा देने और धमकी देने वालों के खिलाफ सख्त जांच कर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
इस मामले की अगली सुनवाई अब 9 अक्टूबर को होगी।

