Waste Water Management in Bihar;गया: बिहार के गया जिले में गंदे पानी की समस्या से परेशान एक गांव ने इसका ऐसा समाधान निकाला है, जिससे अब अपशिष्ट पानी को उपयोगी संसाधन में बदला जा रहा है। बोधगया प्रखंड के बतसपुर गांव में Waste Water Stabilization Pond (WSP) तकनीक के जरिए नाली और शौचालय से निकलने वाले पानी को ट्रीट किया जा रहा है। इसके बाद इस पानी का इस्तेमाल मछली पालन और खेती की सिंचाई में किया जा रहा है।
करीब 350 घरों वाले इस गांव में कुछ समय पहले तक गंदे पानी की वजह से आसपास के लोगों को परेशानी होती थी। गांव का घरेलू अपशिष्ट पानी करीब चार एकड़ में फैले तालाब में पहुंचता था। लगातार गंदा पानी जमा होने के कारण तालाब प्रदूषित हो गया था और आसपास के इलाके में दुर्गंध बनी रहती थी।
WSP Technology से कैसे साफ हो रहा है पानी?
Waste Water Management in Bihar;बतसपुर में पानी के उपचार के लिए Waste Water Stabilization Pond Technology अपनाई गई है। यह अपेक्षाकृत कम लागत वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें अपशिष्ट जल को नियंत्रित तरीके से तालाबनुमा संरचना में रखा जाता है।
इस प्रक्रिया में सूर्य की रोशनी, ऑक्सीजन, सूक्ष्मजीव और प्राकृतिक जैविक क्रियाएं पानी में मौजूद कई प्रकार की जैविक गंदगी को कम करने में मदद करती हैं।
गांव में तालाब से पानी को निकालकर अलग-अलग चार Chambers से गुजारा जाता है। उपचार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पानी को दोबारा तालाब में पहुंचाया जाता है।
जिस तालाब से आती थी बदबू, वहीं शुरू हुआ Fish Farming
Waste Water Management in Bihar;इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि जिस तालाब को कभी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण माना जाता था, उसका अब दोबारा उपयोग किया जा रहा है।
ट्रीटमेंट के बाद तालाब के पानी का इस्तेमाल Fish Farming के लिए किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों के लिए आय का एक नया जरिया तैयार हुआ है।
इसके अलावा किसान इस पानी का इस्तेमाल अपने खेतों की सिंचाई में भी कर रहे हैं। इस तरह Wastewater Treatment के साथ-साथ पानी का दोबारा उपयोग सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
बिना ज्यादा बिजली और Chemical के समाधान
Waste Water Management in Bihar;WSP Model की एक खासियत इसका अपेक्षाकृत सरल और कम लागत वाला संचालन है। इस प्रक्रिया में भारी मशीनरी की जरूरत कम होती है और पानी के उपचार के लिए Chemical-based Treatment पर निर्भरता भी कम रहती है।
इसी वजह से इस तरह की तकनीक ग्रामीण इलाकों में Sustainable Wastewater Management के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जहां महंगे सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम स्थापित करना मुश्किल होता है।
पर्यावरण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा
Waste Water Management in Biharबतसपुर में लागू किया गया मॉडल केवल गंदे पानी और दुर्गंध की समस्या कम करने तक सीमित नहीं है। उपचारित पानी के दोबारा इस्तेमाल से जल संसाधनों पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
मछली पालन से ग्रामीणों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है, जबकि सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने से कृषि गतिविधियों को भी सहारा मिल रहा है।
इस तरह यह पहल Environmental Protection और Rural Economy दोनों को एक साथ जोड़ती नजर आती है।
बिहार का पहला ऐसा मॉडल होने का दावा
Waste Water Management in Bihar;पंचायत के पूर्व उपमुखिया मनोरंजन प्रसाद समदर्शी के मुताबिक, बतसपुर में तैयार किया गया यह बिहार का पहला ऐसा मॉडल है, जहां गंदे पानी को प्राकृतिक तरीके से उपचारित कर दोबारा उपयोग में लाने की दिशा में काम किया गया है।
अगर यह मॉडल लंबे समय तक प्रभावी साबित होता है, तो बिहार के दूसरे ग्रामीण इलाकों में भी इसे अपनाने की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में Wastewater Management, Water Conservation और अतिरिक्त आय के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
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