गाजियाबाद में परिवहन विभाग ने पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ अपना शिकंजा कस दिया है। प्रवर्तन टीमों ने अभियान चलाकर यूरो-1, यूरो-2 और यूरो-3 श्रेणी के पेट्रोल व डीजल वाहनों की सघन जांच की। इस कार्रवाई के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली 12 कारों को निरुद्ध कर सीधे आरवीएसएफ (Registered Vehicle Scrappage Facility) स्क्रैप सेंटर भेज दिया गया। पूरी कार्रवाई एआरटीओ अमित राजन राय और विनीत मिश्रा के नेतृत्व में अंजाम दी गई।
अभियान के दौरान शालीमार गार्डन और राजेंद्र नगर की सोसाइटियों में कार्रवाई का विरोध भी देखने को मिला, जहां स्थानीय वाहन मालिकों ने इसका विरोध किया। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, गाजियाबाद जिले में इस समय लगभग 3.75 लाख पुराने वाहन संचालित हो रहे हैं, जो प्रदूषण का एक बड़ा कारण हैं।
इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक (जनवरी से अगस्त 2026 तक) जिले के पांच अधिकृत स्क्रैप सेंटरों पर कुल 31,377 पुराने वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है। प्रमुख सेंटरों का आंकड़ा इस प्रकार है:
- सेवन स्टार स्क्रैप सेंटर (मैनापुर): 19,329 वाहन
- सरला स्क्रैप सेंटर (मोरटा): 8,800 वाहन
- वाईजीए स्क्रैप सेंटर: 2,590 वाहन
- एसएस एंटरप्राइजेज (लोनी बंथला): 313 वाहन
- आरआर स्विफ्ट सेंटर: 346 वाहन
परिवहन अधिकारी डॉ. सियाराम वर्मा ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में यदि वाहन मालिक स्वेच्छा से अपने पुराने वाहनों को स्क्रैप कराते हैं, तो उन्हें सरकार की ओर से आर्थिक छूट और कई लाभ मिलते हैं। इसके विपरीत, विभागीय कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए वाहनों पर यह वित्तीय लाभ नहीं दिया जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विभाग वाहन मालिकों को अपने पुराने वाहन खुद आगे आकर स्क्रैप कराने के लिए लगातार जागरूक कर रहा है।
