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रिपोर्टर: विकास सिंह

Teachers Day : शिक्षक दिवस के खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के समग्र विकास, डिजिटल तकनीक के प्रभाव और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा का दायरा केवल किताबों तक सीमित न रहकर बच्चों के जीवन और उनके व्यक्तिगत विकास से जुड़ना चाहिए।

हर बच्चे के भीतर छिपे टैलेंट को पहचानना शिक्षक की जिम्मेदारी

Teachers Day प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया कि हर बच्चा पढ़ाई में एक जैसा नहीं हो सकता, लेकिन ईश्वर ने सभी को कोई न कोई विशेष हुनर जरूर दिया है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे प्रत्येक छात्र की विशिष्ट क्षमता को पहचानें और उसे निखारने का प्रयास करें। इस पर शिक्षकों ने भी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि कक्षा में हर विद्यार्थी की चुनौतियां और प्रतिभाएं अलग होती हैं, जिन्हें पहचानना ही एक शिक्षक का मुख्य दायित्व है।

डिजिटल एडिक्शन पर चिंता और स्वास्थ्य जागरूकता पर चर्चा

Teachers Day संवाद में स्क्रीन टाइम की समस्या पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम अब एक लत बनता जा रहा है। इससे बचने के लिए बच्चों को मैदानी खेलों, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों (क्रिएटिविटी) की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता है।

इसी दौरान एक शिक्षिका द्वारा ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता पर किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करने पर प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र काशी (वाराणसी) का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वहां चलाए गए विशेष जागरूकता अभियान के बाद महिलाएं स्वयं जांच कराने आगे आ रही हैं और इस पहल के तहत एक दिन में अधिकतम जांच का रिकॉर्ड भी दर्ज हुआ है।

‘पाठ्यक्रम से बाहर निकलकर बच्चों के जीवन से जुड़ें’

Teachers Day अपने संबोधन के समापन पर पीएम मोदी ने पूरे शिक्षा जगत को संदेश देते हुए कहा कि शिक्षकों को केवल सिलेबस और किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चों के जीवन में गहराई से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंसान के भीतर का बचपन कभी खत्म नहीं होना चाहिए और बच्चों के बचपन को संजोकर रखने में सबसे बड़ी भूमिका एक शिक्षक ही निभा सकता है।

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