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रिपोर्टर: सन्‍तोष सरावगी

Bhitarwar : ग्वालियर जिले की भितरवार तहसील स्थित मस्तूरा गांव के 38 वर्षीय होतम सिंह धानुक की जिंदगी एक अचानक हुए हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई। दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने के कारण वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो चुके हैं। हफ़्तों से बिस्तर पर पड़े होतम सिंह के असहाय होने से उनके परिवार के सामने जीवन-यापन का गहरा संकट खड़ा हो गया है।

मजदूरी बंद होने से गहराया आर्थिक संकट

Bhitarwar हादसे से पूर्व होतम सिंह ही मेहनत-मजदूरी करके अपने सात सदस्यीय परिवार का पेट पालते थे। उनके अपाहिज होने के बाद परिवार की आय का इकलौता जरिया पूरी तरह बंद हो गया। परिवार में उनकी पत्नी किरण बाई (35), वृद्ध पिता भगवानलाल धानुक (77), दो बेटियां सोनिया (18) व तमन्ना (15) तथा दो बेटे राज (11) व कृष्णा (10) शामिल हैं। आय का कोई अन्य स्रोत, कृषि योग्य भूमि या मवेशी न होने से परिवार के लिए दो वक्त के भोजन की व्यवस्था करना भी अत्यंत दुष्कर हो गया है।

बदहाली के कारण छूटी बेटियों की पढ़ाई

Bhitarwar आर्थिक तंगी का सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ा है। दोनों बेटे राज और कृष्णा तो किसी तरह सरकारी स्कूल में क्रमशः आठवीं और सातवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, लेकिन पैसों के अभाव में दोनों बेटियों की शिक्षा बीच में ही छूट गई। परिवार 15×30 फीट के एक अधूरे कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। पत्नी किरण बाई को जब भी मजदूरी का काम मिलता है, तो वे दिन के लगभग 300 रुपये कमा लेती हैं, किंतु इतने बड़े परिवार का पालन-पोषण इस सीमित आय में संभव नहीं हो पा रहा। परिजनों के अनुसार, उन्हें अब तक किसी भी तरह की सरकारी राहत प्राप्त नहीं हुई है।

अन्नपूर्णा मुहिम से मिला राशन और जीवन का नया भरोसा

Bhitarwar अत्यंत विकट परिस्थितियों के बीच परिवार को सोशल मीडिया के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के विषय में जानकारी मिली। इसके पश्चात परिजनों ने सतलोक आश्रम से संपर्क कर सहायता की गुहार लगाई। सूचना मिलते ही मुहिम के सेवादारों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया और 31 अगस्त को पीड़ित परिवार तक आवश्यक खाद्य सामग्री एवं राशन सामग्री पहुँचाई। यह सहायता केवल खाद्यान्न तक सीमित न होकर संकटग्रस्त परिवार के लिए एक बड़ा मानसिक सहारा साबित हुई है, जिससे उन्हें कठिन समय में जीवन जीने की नई उम्मीद मिली है।

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