रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul : बिहार के सुपौल जिले के सरकारी स्कूलों में संचालित हाउसकीपिंग योजना को लेकर भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जन सुराज के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने शिक्षा विभाग और आउटसोर्सिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि बीते तीन सालों में 1800 से अधिक सफाईकर्मियों के मानदेय में करीब 55 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है।
श्रम कानूनों और संविदा की शर्तों को दरकिनार कर गरीब सफाईकर्मियों को उनका पूरा अधिकार देने के बजाय मामूली रकम थमाई जा रही है। इस मामले में जांच समितियों के गठन के बाद भी कोई ठोस विभागीय कार्रवाई न होना अधिकारियों की संलिप्तता की ओर इशारा कर रहा है।
श्रम कानूनों की अनदेखी और कर्मचारियों का शोषण
Supaul योजना के नियमानुसार एनजीओ और हाउसकीपिंग एजेंसियों को सफाईकर्मियों को निर्धारित न्यूनतम वेतन देने के साथ-साथ ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI), यूएएन (UAN) और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं प्रदान करनी हैं। हालांकि, धरातल पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
सफाईकर्मियों को निर्धारित मानदेय के स्थान पर केवल 1,000 से 1,500 रुपये ही दिए जा रहे हैं। प्रति कार्यकर्ता हर साल लगभग 1 लाख रुपये की कटौती की जा रही है, जो तीन वर्षों में 1800 से ज्यादा कर्मचारियों के हिसाब से 55 करोड़ रुपये बैठती है। इसके अलावा, कर्मियों को ड्रेस, पहचान पत्र, बायोमेट्रिक उपस्थिति और हार्पिक व फिनाइल जैसी सफाई सामग्रियों की आपूर्ति भी सुचारु रूप से नहीं की जा रही है।
पूर्व में जांच और जुर्माने के बावजूद मामला शांत
Supaul इस मामले में पहले भी प्रशासनिक स्तर पर खामियां पाई गई थीं। 15 फरवरी 2024 को राज्य परियोजना निदेशक की समीक्षा बैठक के दौरान असंतोषजनक सफाई व्यवस्था को लेकर संबंधित एजेंसियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
इसके बाद 5 अप्रैल 2025 को मरौना प्रखंड के स्कूलों में मिली गंदगी के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने 15 अप्रैल को तीन सदस्यीय जांच समितियों का गठन किया था। आरोप है कि जांच रिपोर्ट तैयार होने के बावजूद फाइलों को दबा दिया गया और एजेंसियों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
दागी एजेंसियों का कार्यकाल बढ़ाने की सिफारिश पर उठे सवाल
Supaul एजेंसियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब उन्हीं पुरानी संस्थाओं को दोबारा काम सौंपने की कवायद शुरू हो गई है। किशनपुर, सुपौल और प्रतापगंज समेत कई प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) ने कर्मियों को कम भुगतान और अव्यवस्थाओं के बावजूद एजेंसियों के काम को मानक के अनुरूप बताकर सेवा विस्तार की अनुशंसा की है।
जन सुराज के जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से चलाई जा रही है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, स्वतंत्र ऑडिट और सफाईकर्मियों के बैंक खातों व ईपीएफ खातों की गहन पड़ताल कराने की मांग की है।
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