रिपोर्टर: अतुल भारती
Dhar Bhojshala Temple Mosque Controversy : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमल मौला परिसर से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की उन याचिकाओं पर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है, जिनमें हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें इस 11वीं सदी के परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है और इस विवाद के समाधान के लिए रोजाना सुनवाई करने की इच्छा जताई है।
Dhar Bhojshala Temple Mosque Controversy नमाज के लिए अलग खुली जगह देने का अंतरिम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक अंतरिम व्यवस्था का सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि मुख्य विवादित ढांचे में किसी भी पक्ष के अधिकारों को प्रभावित किए बिना, अंतरिम उपाय के तौर पर मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे के बीच नमाज अदा करने के लिए परिसर के पास ही कोई अलग खुली जगह मुहैया कराई जा सकती है। इसके साथ ही, कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश दिया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के बिना इस परिसर में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव (Structural Changes) न करे।
Dhar Bhojshala Temple Mosque Controversy ‘अति संवेदनशील मुद्दा, शब्दों के चयन में बरतें सावधानी’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को लेकर दोनों पक्षों के वकीलों को सचेत किया। पीठ ने कहा, “यह बेहद नाजुक मामला है। अदालत कक्ष में कही गई किसी भी बात से बाहर अनावश्यक विवाद खड़ा हो सकता है या समाज में गलत संदेश जा सकता है, इसलिए हमें अपने हर एक शब्द को लेकर बेहद सतर्क रहना होगा।” मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि वर्तमान स्थिति और राज्य में शांति बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए इस मामले को अगले 10 से 15 दिनों के भीतर एक उपयुक्त पीठ के समक्ष अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है।
Dhar Bhojshala Temple Mosque Controversy क्या है 1997 का समझौता और ऐतिहासिक पक्ष?
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने वर्ष 1997 के एक प्रशासनिक समझौते और कलेक्ट्रेट के आदेश का हवाला दिया, जिसके तहत परिसर में हिंदुओं को मंगलवार के दिन पूजा-अर्चना करने और मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। उनका कहना था कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम समुदाय को वहां से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस ऐतिहासिक स्थल पर कभी वाग्देवी (देवी सरस्वती) की मूल प्रतिमा स्थापित थी, जो वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में है, और यहाँ अभी भी नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जा रही है।

