Firozabad Minor Child Murder Case Death Penalty : उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने अपराधियों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया है। फिरोजाबाद की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महज 40 दिनों के भीतर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए, डेढ़ साल के मासूम बच्चे की बेरहमी से हत्या करने वाले कलयुगी चाचा को फांसी की सजा (Death Penalty) सुनाई है। इस नृशंस हत्याकांड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया था।
Firozabad Minor Child Murder Case Death Penalty एकतरफा प्यार का खौफनाक अंत: मासूम आरव को मिली दर्दनाक मौत
यह रूह कंपा देने वाली वारदात 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में घटित हुई थी। सिरसागंज तहसील के बामई गांव की रहने वाली रति का अपने पति सुमित (निवासी बदायूं) से घरेलू विवाद चल रहा था और वह तलाक लेना चाहती थी। इसी दौरान रति के रिश्ते का देवर विराज पाठक (निवासी शेखुपुरा, बदायूं) उससे एकतरफा प्यार करने लगा। वह रति पर शादी करने का लगातार दबाव बना रहा था। जब रति नहीं मानी, तो विराज ने उसके डेढ़ साल के मासूम बेटे आरव को अपनी राह का रोड़ा समझा और दोपहर के समय सरेआम गली में मासूम को आठ बार जमीन पर पटक-पटककर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
Firozabad Minor Child Murder Case Death Penalty पुलिस की त्वरित कार्रवाई: चंद घंटों में एनकाउंटर और 40 दिनों में फांसी
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद हरकत में आई फिरोजाबाद पुलिस ने तत्परता दिखाई। वारदात के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने हत्यारे विराज पाठक को एक मुठभेड़ के दौरान दोनों पैरों में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया था। पीड़ित मां ने अदालत से हत्यारे के लिए सिर्फ और सिर्फ फांसी की मांग की थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट में तेजी से चार्जशीट दाखिल की और फास्ट ट्रैक कोर्ट में दिन-प्रतिदिन सुनवाई सुनिश्चित की।
Firozabad Minor Child Murder Case Death Penalty अदालत का कड़ा रुख, सबूतों और वायरल वीडियो के आधार पर फैसला
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले के सभी वैज्ञानिक तथ्यों, चश्मदीदों की गवाही और घटना के वायरल वीडियो को संज्ञान में लेते हुए आरोपी विराज पाठक को दोषी करार दिया। अदालत ने इस कृत्य को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) मामला मानते हुए अपराधी को फांसी के फंदे पर लटकाने का हुक्म जारी किया। कोर्ट के इस त्वरित फैसले की चारों तरफ सराहना हो रही है, जिसने पीड़ित परिवार को 40 दिन के रिकॉर्ड समय में इंसाफ दिलाया है।

