रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Akaltara : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अकलतरा थाना पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘किरायेदार सत्यापन अभियान’ (Tenant Verification Drive) के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक कथित स्लीपर सेल के संदिग्ध सदस्य को दबोचा है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद राज्य और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।
Akaltara मिनीमाता चौक से दबोचा गया संदिग्ध, पंजाब का है रहने वाला
पकड़ा गया आरोपी पंजाब का मूल निवासी बताया जा रहा है, जिसकी उम्र करीब 23 वर्ष है और उसका नाम सेवक सिंह है। वह अकलतरा के मिनीमाता चौक स्थित एक मकान में किराये पर रह रहा था। पुलिस की रूटीन चेकिंग के दौरान उसकी संदिग्ध गतिविधियों और हाव-भाव को देखकर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो परतें खुलती चली गईं। पुलिस ने जब उसके पास मौजूद डिजिटल गैजेट्स और मोबाइल फोन को खंगाला, तो देश विरोधी नेटवर्क से जुड़े कई हैरान करने वाले साक्ष्य मिले।
Akaltara मोबाइल में मिले पाकिस्तान और सऊदी अरब के कनेक्शन
प्रारंभिक डिजिटल पड़ताल में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद संवेदनशील हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण व्हाट्सएप चैट्स, इंटरनेशनल वीडियो कॉल्स और वॉयस रिकॉर्डिंग्स बरामद हुई हैं। उसके फोन में पाकिस्तान और सऊदी अरब सहित कई अन्य विदेशी देशों के संदिग्ध मोबाइल नंबर मिले हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि आरोपी देश के कई संवेदनशील ठिकानों की गोपनीय जानकारी और तस्वीरें सीमा पार बैठे अपने आकाओं के साथ साझा कर रहा था।
Akaltara फोरेंसिक लैब भेजा गया डेटा, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
मामले की गंभीरता और देश की संप्रभुता को देखते हुए जांजगीर-चांपा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश कर दिया है। इसके साथ ही, उसके मोबाइल और अन्य उपकरणों को जब्त कर डेटा रिकवरी और गहन डिजिटल विश्लेषण के लिए स्टेट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेज दिया गया है।
यह मामला सीधे तौर पर राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय खुफिया विभाग (IB) और अन्य सुरक्षा विंग भी इस स्लीपर सेल के बैकएंड नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। एजेंसियां अब इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि आरोपी छत्तीसगढ़ में कब से सक्रिय था, उसे फंडिंग कहाँ से हो रही थी और राज्य में उसके अन्य मददगार कौन-कौन हैं।

