रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Haryana : महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणू भाटिया का साढ़े चार साल का कार्यकाल अचानक समाप्त हो गया है। कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले के निरीक्षण के दौरान नर्सिंग स्टाफ पर की गई उनकी एक विवादित टिप्पणी ने देशव्यापी विरोध का रूप ले लिया। चौतरफा दबाव के बीच आखिरकार मंगलवार रात उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, प्रशासन उन्हें पद से हटाने का मन बना चुका था और इस विवाद को एक सही मौके के रूप में देखा गया।
Haryana कार्यकाल की कानूनी सीमा और विवादित बयान
रेणू भाटिया ने 19 जनवरी 2022 को आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी। ‘हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम 2012’ की धारा 4(1) के तहत चेयरपर्सन और सदस्यों का सेवाकाल अधिकतम तीन वर्ष ही हो सकता है, जो कि 18 जनवरी 2025 को ही समाप्त हो चुका था। हालांकि, महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक पत्र के जरिए उनके कार्यकाल को अगले आदेश तक बढ़ा दिया था, लेकिन कानूनी तौर पर अधिनियम की सीमा को पार नहीं किया जा सकता था।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब रविवार को अस्पताल के निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां तैनात एक महिला स्टाफ से पूछा कि क्या उनकी बेटी है। स्टाफ के हां कहने पर चेयरपर्सन ने तंज कसते हुए कहा, “क्या आप अपनी बेटी को किसी अजनबी के साथ अकेला छोड़ सकती हैं?”
Haryana नर्सिंग ऑफिसर्स का देशव्यापी विरोध और हड़ताल
इस टिप्पणी के बाद देशभर के नर्सिंग एसोसिएशनों में भारी आक्रोश फैल गया। कुरुक्षेत्र अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने सोमवार को दो घंटे तक काम ठप कर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद बात और बिगड़ गई जब ‘हरियाणा नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ ने मंगलवार को सुबह 10 से 12 बजे तक राज्यव्यापी ‘पेन डाउन स्ट्राइक’ (कार्य बहिष्कार) कर दी, जिससे अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई। इस भारी विरोध के कारण घटनाक्रम तेजी से बदला और उसी रात रेणू भाटिया का इस्तीफा ले लिया गया।
Haryana पार्षद से महिला आयोग की अध्यक्ष तक का राजनीतिक सफर
रेणू भाटिया का भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ एक लंबा और सक्रिय राजनीतिक सफर रहा है। उनके इस सफर की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई, जब वे फरीदाबाद से भाजपा के टिकट पर पार्षद चुनी गईं और बाद में शहर की डिप्टी मेयर बनीं। हालांकि, वर्ष 2010 के पार्षद चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन संगठन में उनकी सक्रियता कम नहीं हुई और उन्होंने हरियाणा भाजपा में प्रदेश प्रवक्ता के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई। इसके बाद, उनके राजनीतिक कद को देखते हुए वर्ष 2017 में तत्कालीन मनोहर लाल खट्टर सरकार के दौरान उन्हें पहली बार महिला आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया। उनके इसी अनुभव और कार्यकुशलता को आधार बनाकर, 19 जनवरी 2022 को मनोहर सरकार ने उन्हें पदोन्नत करते हुए हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन के रूप में एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी।
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