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रिपोर्टर: रतन कुमार

Jamtara : झारखंड के जामताड़ा नगर पंचायत क्षेत्र में नगर निकाय के नाम पर दुकानदारों और व्यापारियों से की जा रही अवैध वसूली के मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। बस पड़ाव और फुटपाथ पर सब्जी बेचने वालों से नियम विरुद्ध पैसे वसूलने की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ जामताड़ा थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।

Jamtara उपायुक्त के निर्देश पर हुई जांच और कार्रवाई

यह पूरा मामला 1 जून को तब सामने आया जब स्थानीय स्तर पर हो रही अवैध वसूली को लेकर जिला उपायुक्त (DC) को एक लिखित शिकायत सौंपी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने नगर पंचायत जामताड़ा की कार्यपालक पदाधिकारी सोमा खंडैत को फौरन जांच करने और आवश्यक कानूनी कदम उठाने का निर्देश दिया।

कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा शुरुआती जांच पूरी करने के बाद जामताड़ा थाने में इस अवैध रैकेट को चलाने वाले अज्ञात तत्वों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया गया।

Jamtara पुलिस ने दर्ज किया केस; साक्ष्य जुटाने में जुटी टीमें

इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए जामताड़ा के टाउन थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर मनोज कुमार महतो ने बताया कि प्रशासन की लिखित शिकायत के आधार पर कांड संख्या 76/26 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस एक्शन: पुलिस अब उन चेहरों और गिरोह की पहचान करने के लिए साक्ष्य (Evidence) जुटा रही है जो नगर निकाय का फर्जी नाम लेकर भोले-भले दुकानदारों को डराते और ठगते थे। अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Jamtara इन प्रमुख इलाकों में सक्रिय था ‘अवैध वसूली गैंग’

जांच और शिकायतों के मुताबिक, अवैध वसूली का यह खेल मुख्य रूप से निम्नलिखित सार्वजनिक और व्यापारिक स्थलों पर चल रहा था:

  • बस पड़ाव (Bus Stand)
  • गुदड़ी हटिया
  • रास हटिया
  • गांधी मैदान के समीप फुटपाथ पर सजने वाली सब्जी दुकानें

Jamtara प्रशासन की जनता और व्यापारियों से विशेष अपील

महत्वपूर्ण चेतावनी: नगर पंचायत प्रशासन ने क्षेत्र के सभी नागरिकों, रेहड़ी-पटरी वालों और व्यापारियों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को बिना वैध (Official) रसीद या अधिकृत सरकारी दस्तावेज के कोई भुगतान न करें। यदि कोई भी व्यक्ति नगर निकाय का प्रतिनिधि बनकर अवैध रूप से धन की मांग करता है, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों को दें।

प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियां न केवल आम लोगों को आर्थिक रूप से प्रताड़ित करती हैं, बल्कि नगर पंचायत की छवि को भी धूमिल करने का प्रयास हैं।

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