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Mumbai : रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की जरूरत पर जोर दिया है। मुंबई में आयोजित ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ की संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने के बाद, उन्होंने कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों को सिर्फ डिग्री बांटने वाले केंद्र बनने के बजाय, प्रैक्टिकल नॉलेज और रिसर्च पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

Mumbai शिक्षा और कॉर्पोरेट जगत में तालमेल है जरूरी

सांसद बृजमोहन अग्रवाल के अनुसार, आज के दौर में उद्योगों (Industries) की जरूरतें बहुत तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने पुराने ढर्रे को छोड़कर अपने सिलेबस और ट्रेनिंग प्रोग्राम को मार्केट डिमांड के हिसाब से अपडेट करना चाहिए। जब तक युवाओं को इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक तैयार नहीं किया जाएगा, तब तक देश की आर्थिक प्रगति को तेज रफ्तार नहीं दी जा सकती।

Mumbai शिक्षा विधेयक 2025 से बदलेंगे हालात

बैठक में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ के अहम बिंदुओं पर चर्चा करते हुए सांसद ने कहा कि यह नया कानून शिक्षा और उद्योग जगत के बीच की दूरी को पाटने में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह विधेयक छात्रों के लिए व्यावहारिक ज्ञान और रोजगार के नए अवसरों के द्वार खोलेगा, जिससे युवा सीधे तौर पर देश के विकास से जुड़ सकेंगे।

Mumbai ‘युवा संगम’ और इंटर्नशिप से मिल रहा है व्यावहारिक अनुभव

बैठक के दौरान ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान के तहत IRCTC द्वारा चलाए जा रहे ‘युवा संगम’ कार्यक्रम की सराहना की गई।

  • इस अनूठी पहल से अब तक 5,200 से अधिक छात्र लाभान्वित हो चुके हैं, जिससे उन्हें देश की विविध संस्कृति और विकास मॉडल को समझने का मौका मिला है।
  • इसके साथ ही, IRCTC छात्रों को समर ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के अवसर भी दे रहा है, जिससे उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम करने का अनुभव (Practical Experience) मिल रहा है।

बृजमोहन अग्रवाल ने भरोसा जताया कि शिक्षा, रिसर्च और कौशल विकास (Skill Development) की दिशा में उठाए जा रहे ये कदम आत्मनिर्भर और विकसित भारत की नींव को बेहद मजबूत बनाएंगे।

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