El Niño : जलवायु वैज्ञानिकों और मौसम विज्ञानियों ने इस वर्ष दुनिया भर के मौसम को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल प्रशांत महासागर में एक बेहद शक्तिशाली ‘अल नीनो’ (El Niño) प्रभाव सक्रिय हो रहा है। इसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में मानसून के पारंपरिक पैटर्न में भारी बदलाव और व्यवधान देखने को मिल सकता है, जिससे कृषि और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
El Niño क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ी है चिंता?
अल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक भू-वैज्ञानिक घटना है, जिसके दौरान प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार पानी के तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जब यह महासागरीय गर्मी वायुमंडल के साथ संपर्क करती है, तो वैश्विक स्तर पर हवाओं के रुख और बादलों के बनने की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाती है। यही वजह है कि इस वर्ष इसके प्रभाव को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक सतर्क हैं।
El Niño एशिया और अफ्रीका में सूखे तथा कम बारिश का खतरा
इस शक्तिशाली अल नीनो का सबसे सीधा और बुरा असर दक्षिण एशियाई देशों (जैसे भारत) और अफ्रीका के कुछ हिस्सों पर पड़ने की आशंका है।
- कमजोर मानसून: इसके प्रभाव से मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिसके कारण वर्षा ऋतु में सामान्य से काफी कम बारिश होने की संभावना है।
- सूखे जैसी स्थिति: समय पर और पर्याप्त बारिश न होने से इन क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं, जिससे फसलों की बुवाई और जल स्रोतों के स्तर पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ेगा।
El Niño कहीं विनाशकारी बाढ़ तो कहीं रिकॉर्ड तोड़ गर्मी
मौसम वैज्ञानिकों ने सचेत किया है कि अल नीनो का प्रभाव केवल कम बारिश तक सीमित नहीं रहेगा। इसके कारण मौसम में चरम बदलाव (Extreme Weather) देखने को मिलेंगे। जहाँ एक तरफ कुछ देश पानी की बूंद-बूंद को तरसेंगे, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के कुछ हिस्सों और दक्षिण अमेरिकी देशों में अत्यधिक मूसलाधार बारिश के चलते विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। इसके साथ ही, दुनिया के कई इलाकों में इस साल गर्मी के पिछले सारे रिकॉर्ड टूटने की भी आशंका जताई गई है।

