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Report by: Arvind Singh

Bhopal : मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली से सामान्य वर्ग के युवाओं को गहरे सदमे में डाल दिया है। बीमा चिकित्सा पदाधिकारी और सहायक शल्य चिकित्सक के पदों के लिए जारी हालिया विज्ञापन ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश की ‘डबल इंजन’ सरकार के एजेंडे में सामान्य वर्ग के प्रतिभावान युवाओं के लिए कोई जगह नहीं बची है। 55 पदों की इस भर्ती में सामान्य वर्ग के लिए एक भी सीट न होना, न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि उन हजारों युवाओं के साथ एक भद्दा मजाक है जो सालों से अपनी आँखों में सरकारी सेवा का सपना संजोए कड़ी मेहनत कर रहे थे।

Bhopal प्रतिभा की बलि: 55 पद, पर सामान्य वर्ग के लिए ‘नो एंट्री’

मध्य प्रदेश सरकार की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्था, MPPSC ने बीमा चिकित्सा पदाधिकारी और सहायक शल्य चिकित्सक के 55 पदों की घोषणा तो की, लेकिन जब आरक्षण का चार्ट सामने आया तो सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। इन 55 सीटों में से सामान्य (अनारक्षित) वर्ग के लिए एक भी पद आवंटित नहीं किया गया है। यह स्थिति दर्शाती है कि योग्यता और कड़ी मेहनत को दरकिनार कर, सरकार केवल तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति को हवा दे रही है। सालों की तपस्या के बाद जब अवसर आया, तो सरकार ने उसे सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए पूरी तरह बंद कर दिया।

Bhopal क्या ‘सामान्य’ होना अब मध्य प्रदेश में अभिशाप है?

इस भर्ती अधिसूचना के बाद प्रदेश के शिक्षित युवाओं में भारी आक्रोश है। युवाओं का सीधा सवाल है कि क्या सामान्य वर्ग में जन्म लेना कोई गुनाह है? जो छात्र दिन-रात एक कर मेडिकल की पढ़ाई पूरी करते हैं और फिर लोक सेवा आयोग की कठिन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, उन्हें आखिर में यह पता चलता है कि वे इस सिस्टम का हिस्सा ही नहीं बन सकते। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार उन्हें “दूध में से मक्खी” की तरह निकाल फेंक रही है। यह केवल एक भर्ती नहीं, बल्कि एक पूरे वर्ग की योग्यता का अपमान है।

Bhopal वादे और हकीकत का अंतर

भाजपा सरकार अपने घोषणापत्रों और मंचों से ‘सबका साथ-सबका विकास’ और सभी वर्गों को समान अवसर देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत में यह भर्ती प्रक्रिया उसके दावों की पोल खोल रही है। जब 55 पदों की महत्वपूर्ण भर्ती में एक भी सीट अनारक्षित नहीं रखी गई, तो सरकार के “सामान्य अवसर” देने के वादे खोखले साबित होते हैं। युवा अब पूछ रहे हैं कि क्या सरकार केवल टैक्स वसूलने और वोट लेने के लिए सामान्य वर्ग का उपयोग करती है, जबकि रोजगार की बारी आने पर उन्हें हाशिए पर धकेल दिया जाता है?

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