Report by: Ravindra Singh
Ranchi : पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र से गुजरने वाली स्वर्णरेखा नदी इन दिनों सुर्खियों में है। गुरुवार को नदी के बीचों-बीच एक और विशालकाय संदिग्ध मिसाइल बम मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। माना जा रहा है कि यह विस्फोटक द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय का है, जो दशकों से नदी की तलहटी में दबा हुआ था।
Ranchi मछली पकड़ने गए ग्रामीणों ने देखा ‘मौत का गोला’
यह घटना पानीपोड़ा गांव के पास की है, जहां कुछ ग्रामीण रोजाना की तरह नदी में मछली पकड़ने गए थे। इसी दौरान उनकी नजर पानी के बीच एक भारी धातु की वस्तु पर पड़ी। पास जाकर देखने पर उन्हें आभास हुआ कि यह कोई सामान्य वस्तु नहीं बल्कि एक शक्तिशाली बम हो सकता है। ग्रामीणों ने बिना देर किए इसकी सूचना बहरागोड़ा पुलिस को दी। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर इलाके को सील कर दिया और लोगों को नदी से दूर रहने की हिदायत दी है।
Ranchi 200 किलो से ज्यादा वजन, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
स्थानीय लोगों और शुरुआती अनुमानों के अनुसार, इस मिसाइल बम का वजन लगभग 200 से 227 किलोग्राम के बीच बताया जा रहा है। इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे बेहद संवेदनशील माना है। सुरक्षा के मद्देनजर नदी तट पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और सेना (Indian Army) के बम निरोधक दस्ते को सूचित किया गया है। विशेषज्ञों की टीम ही अब इस बम की स्थिति और इसे सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज करने के रास्ते तलाशेगी।
Ranchi द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा है इस क्षेत्र का गहरा इतिहास
स्वर्णरेखा नदी के पास बार-बार मिल रहे इन विस्फोटकों का सीधा संबंध द्वितीय विश्व युद्ध से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों के अनुसार, झारखंड का रामगढ़ और आसपास का इलाका उस समय सैन्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। रामगढ़ में तब अमेरिकी प्रशिक्षकों द्वारा चीनी सैनिकों को जापानी सेना से लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होने के कारण यहां भारी मात्रा में सैन्य साजो-सामान का भंडारण था। संभवतः यह बम उसी दौर के बचे हुए ‘अनफटने वाले’ (Unexploded) हथियारों का हिस्सा हैं।
Ranchi एक महीने में तीसरी बरामदगी: ग्रामीणों में बढ़ा डर
हैरानी की बात यह है कि पिछले कुछ हफ्तों में यह तीसरी बार है जब स्वर्णरेखा नदी से इस तरह का बम मिला है:
- 17-18 मार्च 2026: बालू खनन के दौरान पहला बम मिला जिसे सेना ने डिफ्यूज किया।
- मार्च के अंत में: दूसरा विस्फोटक बरामद कर नियंत्रित धमाके के जरिए नष्ट किया गया।
- 16 अप्रैल 2026: अब यह 200 किलो का तीसरा बम मिला है।
लगातार मिल रहे विस्फोटकों के कारण ग्रामीण डरे हुए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरी नदी और आसपास के क्षेत्रों का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना को टाला जा सके।
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