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Report by: Ganesh Kumar

Delhi : बिहार की राजनीति में लगभग दो दशकों तक सत्ता की धुरी रहे नीतीश कुमार ने आज राष्ट्रीय राजनीति की ओर अपना रुख कर लिया है। शुक्रवार दोपहर 12:15 बजे, राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने नीतीश कुमार को उच्च सदन के सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। हिंदी में ली गई इस शपथ के साथ ही बिहार में ‘सुशासन बाबू’ के लंबे मुख्यमंत्री काल के अंत की शुरुआत हो गई है।

समारोह के दौरान जे.पी. नड्डा, निर्मला सीतारमण और ललन सिंह जैसे दिग्गज नेताओं की उपस्थिति ने इस मौके को और भी खास बना दिया।

Delhi ‘दिल्ली वापसी’ पर भावुक हुए नीतीश: “पहले तो हम यहीं न थे”

शपथ ग्रहण के बाद संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए नीतीश कुमार पुराने संस्मरणों में खोए नजर आए। जब उनसे उनकी नई भूमिका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “पहले तो हम यहीं न थे।” यह बयान उनके उस दौर की याद दिलाता है जब वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल मंत्री और कृषि मंत्री के रूप में केंद्र की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा हुआ करते थे। नीतीश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बिहार में अपना काम पूरा कर लिया है और अब वे दिल्ली की जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

Delhi प्रधानमंत्री की बधाई और ‘इस्तीफे’ की समय सीमा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को बधाई देते हुए उन्हें देश के सबसे अनुभवी और समर्पित नेताओं में से एक बताया। सियासी सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री पद से अपना औपचारिक इस्तीफा राज्यपाल को सौंप सकते हैं। उन्होंने खुद मीडिया से पुष्टि की है कि बिहार में जल्द ही नए मुख्यमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। दिल्ली में आज शाम पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ होने वाली बैठक को इसी ‘सत्ता हस्तांतरण’ की अंतिम मुहर माना जा रहा है।

Delhi सम्राट चौधरी: बिहार के अगले ‘कप्तान’ की रेस में सबसे आगे

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार की कमान किसके हाथ में होगी? फिलहाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।

  • जातीय समीकरण: सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं, जो बिहार में दूसरा सबसे बड़ा ओबीसी वोट बैंक है।
  • भाजपा की रणनीति: नीतीश कुमार ने हाल ही में सार्वजनिक मंचों पर सम्राट चौधरी के कंधों पर हाथ रखकर संकेत दिया था कि भविष्य में उन्हें राज्य की जिम्मेदारी संभालनी होगी। हालांकि, विजय कुमार सिन्हा और नित्यानंद राय के नामों पर भी चर्चा जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय 14 अप्रैल को होने वाली एनडीए विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा।

Delhi 20 साल का सफर: विकास और विवादों के बीच का दौर

नीतीश कुमार ने 2005 में पहली बार बिहार की बागडोर संभाली थी। उनके कार्यकाल को सड़कों के जाल, महिला सशक्तीकरण (साइकिल योजना) और कानून व्यवस्था में सुधार के लिए याद किया जाएगा। हालांकि, बार-बार पाला बदलने (गठबंधन परिवर्तन) के कारण उन्हें ‘पलटूराम’ जैसे तंजों का भी सामना करना पड़ा। अब उनके दिल्ली जाने को बिहार भाजपा के लिए अपनी स्वतंत्र जमीन तैयार करने के एक सुनहरे अवसर के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि 15 या 16 अप्रैल को बिहार की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह राजभवन में आयोजित हो सकता है।

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