Report by: Yogendra Singh
Dantewada : छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। शासन की पुनर्वास नीति “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” (नयी सुबह) से प्रेरित होकर दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के 5 सक्रिय माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। पुलिस लाइन कारली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इन कैडरों ने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
9 लाख के इनामी कैडर और महिला शक्ति का सरेंडर
Dantewada आत्मसमर्पण करने वाले इन 5 माओवादियों में 4 महिला कैडर शामिल हैं, जो संगठन के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थीं। इन सभी पर शासन द्वारा कुल 9 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
- प्रमुख नाम: आत्मसमर्पण करने वालों में सोमे कड़ती, लखमा ओयाम, सरिता पोड़ियाम, जोगी कलमू और मोटी ओयाम शामिल हैं।
- सक्रियता: ये कैडर भैरमगढ़ और गंगालूर एरिया कमेटी में लंबे समय से सक्रिय थे।
- हृदय परिवर्तन: आत्मसमर्पित नक्सलियों ने स्वीकार किया कि माओवादी विचारधारा अब खोखली हो चुकी है और वे संगठन के भीतर हो रहे शोषण और भेदभाव से तंग आकर शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं।
हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद: 40 घातक हथियार जब्त
Dantewada इस आत्मसमर्पण की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल कैडरों का लौटना नहीं, बल्कि उनके द्वारा दी गई सूचनाओं के आधार पर हुई बरामदगी है। सुरक्षा बलों ने आत्मसमर्पित नक्सलियों की निशानदेही पर विभिन्न गुप्त ठिकानों से 40 घातक हथियारों का जखीरा बरामद किया है।
इन हथियारों में शामिल हैं:
- एसएलआर (SLR) और इंसास रायफल
- बीजीएल (BGL) लॉन्चर
- विस्फोटक और अन्य आधुनिक हथियार
इतनी बड़ी संख्या में हथियारों की बरामदगी को बस्तर संभाग में नक्सलियों की मारक क्षमता पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
दंतेवाड़ा में नक्सल विरोधी अभियान के आंकड़े (2024)
Dantewada पुलिस और प्रशासन की सजगता के कारण जिले में नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। पुलिस द्वारा साझा किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार:
| विवरण | संख्या (2024 से अब तक) |
| मुख्यधारा में लौटे (आत्मसमर्पण) | 607 |
| गिरफ्तार किए गए नक्सली | 92 |
| मुठभेड़ में मारे गए माओवादी | 54 |
प्रशासनिक रुख: आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी पूर्व माओवादियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तत्काल सहायता राशि और भविष्य में स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि ‘बंदूक’ छोड़ने वाले हाथों में ‘हुनर’ हो, ताकि बस्तर में स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके।
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