Mon Pradosha Vrat Katha : सनातन धर्म में सोम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
मार्च 2026 में यह दूसरा सोम प्रदोष व्रत है। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को कथा सुनना या पढ़ना विशेष फलदायी माना जाता है।
सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
Mon Pradosha Vrat Katha प्राचीन समय में एक नगर में एक निर्धन विधवा ब्राह्मणी रहती थी। उसका जीवन अत्यंत कठिन था। वह रोज अपने छोटे बेटे के साथ भिक्षा मांगकर अपना गुजारा करती थी।
एक दिन घर लौटते समय उसे रास्ते में एक घायल बालक मिला। दया से प्रेरित होकर ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आई और उसकी सेवा करने लगी। बाद में पता चला कि वह बालक विदर्भ का राजकुमार है, जिसके राज्य पर शत्रुओं ने कब्जा कर लिया था और उसके पिता को बंदी बना लिया था।
राजकुमार वहीं ब्राह्मणी के घर रहने लगा। कुछ समय बाद अंशुमति नाम की एक गंधर्व कन्या ने उसे देखा और उससे प्रभावित हो गई। उसके माता-पिता को भी राजकुमार योग्य लगा।
एक रात भगवान शिव ने अंशुमति के माता-पिता को स्वप्न में दर्शन देकर आदेश दिया कि दोनों का विवाह करा दिया जाए। उन्होंने भगवान की आज्ञा मानते हुए विवाह संपन्न कराया।
व्रत की शक्ति से बदली किस्मत
Mon Pradosha Vrat Katha वह ब्राह्मणी नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखती थी। उसके व्रत के पुण्य और गंधर्वराज की सहायता से राजकुमार ने अपने शत्रुओं को पराजित कर दिया और अपना राज्य वापस हासिल कर लिया।
राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना मंत्री बना लिया और सभी सुख-समृद्धि के साथ जीवन बिताने लगा।
कथा का संदेश
Mon Pradosha Vrat Katha इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया प्रदोष व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। भगवान शिव अपने भक्तों की हर कठिनाई को दूर करते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
जरूरी सूचना
यह जानकारी धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित है। इसका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
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