Report by: Tuntun Kumar
Motihari : बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चिरैया थाना क्षेत्र से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक महिला, जिसे समाज सामान्य समझ रहा था, वह भीतर ही भीतर एक खूंखार ‘सीरियल किलर’ बन चुकी थी। 5 साल की मासूम अंशिका की निर्मम हत्या के तार जब पुलिस ने जोड़े, तो एक ऐसी अपराधी का चेहरा सामने आया जिसने न केवल मासूमों बल्कि अपने माता-पिता तक को मारने की खौफनाक साजिश रच रखी थी।

मासूम अंशिका की हत्या और साजिश का वो ‘ऑडियो’ जाल
Motihari घटना की शुरुआत 20 मार्च को हुई, जब 5 वर्षीय अंशिका अचानक लापता हो गई। दो दिनों की सघन तलाशी के बाद 22 मार्च को बच्ची का शव बरामद हुआ। पुलिसिया जांच में जो तथ्य सामने आए, वे किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं थे। आरोपी शिल्पी ने हत्या के लिए ऑनलाइन शॉपिंग साइट से विशेष रूप से चाकू मंगवाया था।
खुद को बचाने के लिए शिल्पी ने एक शातिर चाल चली; उसने हत्या से पहले मासूम बच्ची से एक ऑडियो रिकॉर्ड करवाया, जिसमें बच्ची से जबरन उसकी ‘बड़ी मां’ पर आरोप लगवाए गए थे। शिल्पी का इरादा इस ऑडियो को वायरल कर हत्या का दोष दूसरे पर मढ़ना था। हालांकि, तकनीक और फॉरेंसिक जांच ने इसी ऑडियो को शिल्पी के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बना दिया। उसने बच्ची की हत्या कर शव को बाल्टी में छिपाकर मचान पर रख दिया था, जो उसकी क्रूरता की पराकाष्ठा थी।
18 वारदातों का कबूलनामा: जलते इंसान और ‘यज्ञ’ की सनक
Motihari गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने शिल्पी से कड़ाई से पूछताछ की, तो अपराधों का एक काला चिट्ठा खुल गया। शिल्पी ने स्वीकार किया कि वह अब तक 18 आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे चुकी है। इसमें सबसे चौंकाने वाला खुलासा 22 जुलाई 2025 की घटना का था, जब उसने राम अयोध्या सिंह को जिंदा जला दिया था। उस समय प्रशासन ने इसे एक सामान्य आगजनी की घटना माना था, लेकिन अब सच सामने आ चुका है।
शिल्पी की मानसिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने पूछताछ में बताया कि वह कई और हत्याएं कर एक ‘यज्ञ’ पूरा करना चाहती थी। उसके निशाने पर न केवल ग्रामीण थे, बल्कि वह अपने सगे माता-पिता की हत्या की भी योजना बना चुकी थी। उसके अनुसार, प्यार में मिले धोखे ने उसे समाज और रिश्तों के प्रति नफरत से भर दिया था।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: 72 घंटे में सलाखों के पीछे ‘सीरियल किलर’
Motihari इस बेहद जटिल और संवेदनशील मामले को सुलझाने के लिए सिकरहना एसडीपीओ उदय शंकर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और स्थानीय इनपुट के आधार पर महज तीन दिनों के भीतर इस गुत्थी को सुलझा लिया। शिल्पी की गिरफ्तारी के बाद उसे मोतिहारी सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।
पुलिस की इस सफलता से चिरैया के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, हालांकि शिल्पी के बयानों ने इलाके में अभी भी दहशत पैदा कर रखी है। पुलिस अब उन सभी 18 मामलों की फाइलों को फिर से खोल रही है, जिनका संबंध शिल्पी के कबूलनामे से है, ताकि हर पीड़ित को न्याय मिल सके।
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