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Report by: Ajit Kumar Thakur

Supaul : बिहार के सुपौल जिले में एक सजायाफ्ता कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बवाल मच गया है। जेल प्रशासन द्वारा कैदी को तबीयत खराब होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस घटना की खबर मिलते ही परिजनों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने शहर के व्यस्ततम महावीर चौक को पूरी तरह जाम कर दिया। घंटों चले इस प्रदर्शन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था ठप रही और प्रशासन को स्थिति संभालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

जेल में बिगड़ी तबीयत: अस्पताल पहुँचते ही तोड़ा दम

Supaul मृतक कैदी की पहचान सुबोध कुमार सादा (पिता: महेंद्र सदा) के रूप में हुई है, जो पथरा दक्षिण, वार्ड नंबर 2 के निवासी थे। जानकारी के अनुसार, सुबोध धारा 302 (हत्या) के एक मामले में सुपौल जेल में अपनी सजा काट रहे थे। जेल अधीक्षक के मुताबिक, अचानक सुबोध की तबीयत खराब होने की शिकायत मिली, जिसके बाद जेल प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तत्काल सदर अस्पताल सुपौल में भर्ती कराया।

हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद सुबोध को बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई। जेल प्रशासन इसे प्राकृतिक मौत मान रहा है, लेकिन परिजनों ने इस पर सवाल खड़े किए हैं।

महावीर चौक पर प्रदर्शन: “कफन तक के पैसे नहीं, हमें न्याय चाहिए”

Supaul जैसे ही सुबोध की मौत की सूचना उनके घर पहुँची, परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ सड़कों पर उतर आई। आक्रोशित लोगों ने शहर के हृदय स्थल महावीर चौक पर टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों का विलाप देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

परिजनों की मुख्य मांगें और दर्द:

  • आर्थिक बदहाली: परिजनों ने रोते हुए बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। आलम यह है कि अंतिम संस्कार और कफन तक के लिए उनके पास संसाधन नहीं हैं।
  • निष्पक्ष जांच: परिजनों ने आरोप लगाया कि जेल के भीतर सुबोध की देखभाल में लापरवाही बरती गई। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और उचित मुआवजे की मांग की है।
  • ट्रैफिक जाम: प्रदर्शन के कारण चौक के चारों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रशासनिक हस्तक्षेप: एसडीओ के आश्वासन के बाद खुला जाम

Supaul मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे। काफी देर तक समझाने-बुझाने के बाद भी जब परिजन हटने को तैयार नहीं हुए, तब सदर एसडीओ (SDO) स्वयं घटनास्थल पर पहुँचे।

एसडीओ ने परिजनों से वार्ता की और उन्हें आश्वस्त किया कि मामले की नियमानुसार जांच कराई जाएगी और सरकारी प्रावधानों के तहत संभव सहायता प्रदान की जाएगी। प्रशासनिक आश्वासन के बाद परिजन सड़क से हटने को तैयार हुए, जिसके बाद पुलिस ने यातायात को पुनः सुचारू कराया। फिलहाल, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो पाएगा।

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