Mahasamund ropeway accidentMahasamund ropeway accident
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Report by: Ravindra Singh

Mahasamund ropeway accident : छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माँ खल्लारी मंदिर में हुए हालिया रोपवे हादसे ने सुरक्षा इंतजामों और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 22 मार्च को हुई इस दुखद घटना के बाद सियासी गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर गठित 6 सदस्यीय विशेष जांच टीम ने घटनास्थल का विस्तृत मुआयना किया। खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव के नेतृत्व में पहुंची इस टीम ने हादसे की जड़ों तक पहुँचने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की जांच की है।

तकनीकी खामियां और मेंटेनेंस में बड़ी चूक

Mahasamund ropeway accident कांग्रेस की जांच टीम ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह हादसा महज एक संयोग नहीं, बल्कि प्रबंधन की बड़ी लापरवाही का नतीजा था। निरीक्षण के दौरान चार मुख्य बिंदुओं—मेंटेनेंस रिकॉर्ड, विद्युत व्यवस्था, संचालन टीम की दक्षता और चेकलिस्ट—पर ध्यान केंद्रित किया गया।

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि नवरात्रि पर्व से ठीक तीन दिन पहले रोपवे का मेंटेनेंस किया गया था। नियमों के मुताबिक, ऐसे संवेदनशील कार्यों के समय किसी उच्च तकनीकी विशेषज्ञ का होना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ यह कार्य अनुभवहीन कर्मियों द्वारा किया गया। टीम के अनुसार, अपर स्टेशन के मुख्य ‘व्हील’ (चक्क) को बदला गया था, जो पुराने स्पेयर पार्ट्स से तकनीकी रूप से मेल नहीं खाता था। इसी बेमेल फिटिंग के कारण रोपवे का संतुलन बिगड़ा और यह भयावह हादसा हुआ।

अनुभवहीन टीम और बिजली संकट की अनदेखी

Mahasamund ropeway accident हादसे का एक अन्य प्रमुख कारण रोपवे संचालन में अनुभवहीनता और बुनियादी सुविधाओं का अभाव माना जा रहा है। जांच दल ने पाया कि पिछले दो-तीन महीनों से मंदिर परिसर में बिजली की आपूर्ति सुचारू नहीं थी। इस वजह से रोपवे को लगातार जनरेटर के भरोसे चलाया जा रहा था। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि जनरेटर से मिलने वाली अस्थिर बिजली की वजह से मोटरों पर दबाव पड़ता है।

सबसे गंभीर बात यह रही कि पहले रोपवे का संचालन एक अनुभवी और प्रशिक्षित टीम कर रही थी, लेकिन हाल ही में अज्ञात कारणों से उन्हें हटाकर स्थानीय और कम अनुभवी युवाओं को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। इन कर्मियों को आपातकालीन स्थिति से निपटने या नियमित चेकलिस्ट के पालन का उचित प्रशिक्षण नहीं था। इसी अनुभवहीनता ने सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया, जिसका खामियाजा निर्दोष श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ा।

मृतकों के आंकड़ों में वृद्धि और मुआवजे की मांग

Mahasamund ropeway accident हादसे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों की संख्या अब बढ़कर दो हो गई है। हाल ही में महासमुंद निवासी 47 वर्षीय गोविंद स्वामी ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उनकी पत्नी और बेटी अभी भी अस्पताल में जीवन और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

इस घटना पर राजनीति और जन-आक्रोश भी बढ़ रहा है। कांग्रेस जांच दल ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपये की सम्मानजनक आर्थिक सहायता दी जाए और घायलों का इलाज पूरी तरह नि:शुल्क सुनिश्चित किया जाए। हालांकि, मुख्यमंत्री ने वर्तमान में मृतकों के परिजनों के लिए 5 लाख रुपये और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता राशि की घोषणा की है। स्थानीय नागरिकों और जांच टीम का कहना है कि जब तक दोषी कंपनी और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक पीड़ितों को वास्तविक न्याय नहीं मिलेगा।

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