Report by: Ajit Thakur
Supaul : बिहार के सुपौल जिले में पुलिस और नगर परिषद के कर्मचारियों के बीच उपजा विवाद अब बड़े संकट का रूप ले चुका है। सदर पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज नगर परिषद के सफाईकर्मियों ने सामूहिक हड़ताल का ऐलान कर दिया है। सोमवार, 16 मार्च 2026 को इस हड़ताल के कारण पूरे सुपौल शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। सड़कों और मुख्य चौराहों पर कचरे का अंबार लगने लगा है, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह पूरा विवाद एक मारपीट की घटना और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से शुरू हुआ।
विवाद की जड़: नाला निर्माण के दौरान मारपीट और गाली-गलौज
Supaul मामले की शुरुआत सुपौल नगर परिषद के वार्ड संख्या 22 से हुई। जानकारी के अनुसार, रविवार को वहां नाला खुदाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान अबू बकर नामक एक युवक ने साइट पर पहुँचकर काम में बाधा डाली। आरोप है कि युवक ने जेसीबी चालक के साथ न केवल गाली-गलौज की, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की।
पीड़ित चालक का कहना है कि आरोपी ने उसके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त हो गया। इस घटना के बाद नगर परिषद के कर्मचारी न्याय की मांग को लेकर और शिकायत दर्ज कराने के लिए एससी-एसटी (SC/ST) थाना पहुँचे, लेकिन वहां पुलिस का रवैया उनके प्रति असहयोगात्मक रहा।
थाना गेट पर कचरा और पुलिस की जवाबी छापेमारी
Supaul सफाईकर्मियों का आरोप है कि एससी-एसटी थाना की पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने में आनाकानी की। पुलिस के इस कथित ढुलमुल रवैये से नाराज होकर सफाईकर्मियों ने विरोध स्वरूप थाना के मुख्य द्वार पर ही कचरा फेंक दिया। इस घटना ने विवाद में घी का काम किया।
आरोप है कि इस विरोध प्रदर्शन से नाराज पुलिस ने देर रात ‘लोकल बॉडीज संगठन’ के महासचिव और नगर परिषद के क्लर्क असजद आलम के घर पर छापेमारी की। सफाईकर्मियों का दावा है कि पुलिस ने घर में घुसकर मारपीट की और असजद आलम सहित कुल 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से प्रतिशोध की भावना से की गई है।
‘रिहाई नहीं तो काम नहीं’: सफाईकर्मियों की मांग और शहर का हाल
Supaul पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के विरोध में आज शहर के सभी सफाईकर्मी एकजुट हो गए और काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि गिरफ्तार किए गए सभी कर्मियों को अविलंब और ससम्मान रिहा किया जाए। साथ ही, वे एससी-एसटी थानाध्यक्ष और एक सब-इंस्पेक्टर पर भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सफाईकर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं और दोषी पुलिस अधिकारियों पर एसपी (SP) संज्ञान नहीं लेते, तब तक शहर का कचरा नहीं उठाया जाएगा। इधर, हड़ताल के कारण शहर की गलियां और बाजार गंदगी से पटने लगे हैं, जिससे महामारी फैलने का डर भी सताने लगा है। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और एसपी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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