Report by: Avinash Srivastwa
Rohtas : रोहतास जिले के नागरिकों को सुलभ और सस्ता न्याय दिलाने के उद्देश्य से शनिवार को जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर का शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, अनुज कुमार जैन ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारी प्रणव कुमार झा, एडीएम ललित भूषण और सदर डीएसपी दिलीप कुमार सहित कई अधिवक्ता उपस्थित रहे।

लोक अदालत: समय और धन की बचत का सशक्त माध्यम
Rohtas समारोह को संबोधित करते हुए जिला जज अनुज कुमार जैन ने लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह छोटे-बड़े वादों के निष्पादन की एक सशक्त वैकल्पिक व्यवस्था है।
- अंतिम निपटारा: यहाँ आपसी सहमति से होने वाले फैसलों के बाद कोई अपील नहीं होती, जिससे विवादों का पूर्ण अंत होता है।
- आर्थिक लाभ: पक्षकारों को कोर्ट फीस और वकील की फीस से राहत मिलती है।
- सद्भाव: यह व्यवस्था समाज में भाईचारे को बढ़ावा देती है और न्यायालयों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करती है।
सासाराम, डेहरी और बिक्रमगंज में 20 बेंच गठित
Rohtas मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए पूरे जिले में कुल 20 बेंचों का गठन किया गया है:
- सासाराम: जिला व्यवहार न्यायालय में सर्वाधिक 11 बेंच काम कर रहे हैं।
- डेहरी अनुमंडल: यहाँ 4 बेंचों पर सुनवाई चल रही है।
- बिक्रमगंज अनुमंडल: यहाँ 5 बेंचों के माध्यम से मामलों का निपटारा किया जा रहा है।
इन बेंचों पर मुख्य रूप से दीवानी मामले, बैंक ऋण वसूली, वैवाहिक विवाद, राजस्व, दाखिल-खारिज, दुर्घटना मुआवजा और पारिवारिक झगड़ों से संबंधित सुलहनीय वादों का निपटारा किया जा रहा है।
24,168 मामले चिन्हित, नोटिस के माध्यम से बुलाई गई भीड़
Rohtas जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव कुमार कृष्ण देव ने जानकारी दी कि इस लोक अदालत के लिए कुल 24,168 मामलों को चिन्हित किया गया है। चिन्हित किए गए मामलों के पक्षकारों को पहले ही नोटिस भेजकर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि लोक अदालत का मूल मंत्र ‘कम समय और कम खर्च में न्याय’ है, ताकि आम आदमी को अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें।
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