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Report by: Avinash Srivastwa

Rohtas : बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून के बावजूद शराब से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला रोहतास जिले से सामने आया है, जहाँ सासाराम सदर अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक पर पटना प्रमंडल के कमिश्नर की पत्नी का नशे की हालत में इलाज करने का संगीन आरोप लगा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी खलबली मचा दी है। जहाँ एक ओर विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा है, वहीं डॉक्टर ने इसे अपने खिलाफ एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

मुंडेश्वरी धाम से वापसी के दौरान उपजा विवाद

Rohtas घटना के संबंध में बताया जाता है कि पटना प्रमंडल के कमिश्नर अनिमेष पराशर की पत्नी और उनकी माता कैमूर स्थित प्रसिद्ध मुंडेश्वरी धाम के दर्शन कर वापस लौट रही थीं। इसी दौरान पहाड़ी मार्ग पर चलने के क्रम में कमिश्नर की पत्नी के पैर में एक कांटा चुभ गया, जिससे उन्हें काफी पीड़ा हो रही थी। तत्काल राहत के लिए जिले की मेडिकल टीम को सूचित किया गया।

सूचना मिलते ही सासाराम सदर अस्पताल के कार्यकारी उपाधीक्षक डॉ. आशीत रंजन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। सूत्रों का दावा है कि जब डॉक्टर कांटा निकालने की प्रक्रिया शुरू कर रहे थे, तब उनके बोलने के लहजे और व्यवहार को देखकर कमिश्नर की पत्नी को संदेह हुआ कि डॉक्टर नशे की स्थिति में हैं। आरोप है कि जैसे ही चिकित्सक को अपनी जांच होने का डर सताया, वे आनन-फानन में वहां से चले गए।

सिविल सर्जन ने मांगा जवाब, विभागीय कार्रवाई की लटकी तलवार

Rohtas इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रोहतास के सिविल सर्जन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉ. आशीत रंजन से लिखित स्पष्टीकरण (Show-cause notice) मांगा है। प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि क्या ड्यूटी के दौरान डॉक्टर वास्तव में किसी प्रकार के नशे में थे या यह केवल एक गलतफहमी है।

अस्पताल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि डॉक्टर द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। हालांकि, इस संवेदनशील मुद्दे पर सिविल सर्जन ने आधिकारिक तौर पर कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से फिलहाल परहेज किया है, जिससे मामले में रहस्य और गहरा गया है।

डॉक्टर का पलटवार: “साजिश के तहत फंसाया जा रहा है”

Rohtas दूसरी ओर, आरोपी डॉक्टर आशीत रंजन ने मीडिया के समक्ष आकर अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए दावा किया कि उनकी कमिश्नर की पत्नी से मुलाकात तक नहीं हुई है, इलाज तो बहुत दूर की बात है। डॉक्टर ने इस पूरे प्रकरण को अस्पताल के भीतर चल रही आपसी खींचतान का परिणाम बताया है।

उनका सीधा आरोप है कि सिविल सर्जन कार्यालय के एक लिपिक, जिस पर अस्पताल की महिला कर्मियों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है, उन पर गलत दबाव बना रहे थे। डॉक्टर के अनुसार, उस लिपिक के खिलाफ चल रही जांच में सहयोग न करने के कारण उन्हें सुनियोजित तरीके से फंसाया जा रहा है। उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा, “सर्किट हाउस और ट्रॉमा सेंटर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

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