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MNREGA: कांग्रेस के राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को मनरेगा योजना के नाम और स्वरूप में बदलाव के विरोध में आंदोलन चलाने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में देशभर के श्रमिक शामिल हुए और उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से मिट्टी डालकर योजना के महत्व को रेखांकित किया।

MNREGA: मनरेगा बचाओ अभियान और प्रतीकात्मक प्रदर्शन

10 जनवरी को कांग्रेस ने संप्रग सरकार के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के विरोध में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की शुरुआत की थी। सम्मेलन में श्रमिकों ने अपने कार्यस्थलों से मुट्ठीभर मिट्टी लाकर पौधों में डालकर विरोध जताया। पार्टी का उद्देश्य है कि मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में, यानी ग्रामीणों के अधिकारों और पंचायतों के अधिकारों के संरक्षण के साथ पुनः स्थापित किया जाए।

राहुल गांधी के तर्क और आलोचना

राहुल गांधी का कहना है कि मनरेगा के कई प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं और सरकार ने बिना उचित अध्ययन और विचार-विमर्श के नई योजना लागू की। आलोचकों का कहना है कि यह तर्क हास्यास्पद है, क्योंकि बीते दो दशकों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परिस्थितियों में काफी बदलाव हुआ है। योजना में संशोधन आवश्यक था, ताकि भ्रष्टाचार कम हो और ग्रामीण विकास अधिक प्रभावी ढंग से हो सके।

नई योजना के लाभ

नई योजना (वीबी जीरामजी) के तहत काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 की गई है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा बनाने और कार्यों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपाय किए गए हैं। योजना में राज्यों का योगदान बढ़ाने से उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। इस सुधार से ग्रामीण विकास और रोजगार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष: विवाद और वास्तविकता

मनरेगा को लेकर कांग्रेस का विरोध राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है। जबकि सरकार का तर्क है कि योजना सुधार ग्रामीण जीवन को मजबूत बनाने और भ्रष्टाचार कम करने के उद्देश्य से की गई है। ग्रामीण रोजगार और आधारभूत संरचना में सुधार के लिए यह कदम आवश्यक और लाभकारी साबित होगा।

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