By: Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित चार नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को लेकर कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चिंता उनकी इन-हैंड सैलरी यानी मिलने वाली टेक-होम सैलरी में संभावित कटौती की थी। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की तरफ से निर्धारित 15,000 रुपये की अनिवार्य बेसिक वेतन सीमा को ही कर्मचारी भविष्य निधि (PF) के लिए आधार माना जाता है, तो नई श्रम संहिता लागू होने के बाद भी कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि लाखों कर्मचारियों की जेब में जाने वाली मासिक सैलरी पहले की तरह ही बनी रहेगी।
क्या है कर्मचारियों की चिंता?
नई श्रम संहिता में ऐसा प्रावधान किया गया है कि कर्मचारी की सैलरी स्ट्रक्चर में बेसिक सैलरी कुल वेतन का 50% या उससे अधिक होना चाहिए। वर्तमान में कई कंपनियां CTC का बड़ा हिस्सा भत्तों और अन्य सुविधाओं में बांट देती हैं, जिससे बेसिक वेतन कम रहता है। बेसिक वेतन जितना कम होगा, PF में कटौती भी उतनी ही कम होती है। इसी वजह से कर्मचारियों को आशंका थी कि बेसिक 50% होने से PF कटौती बढ़ जाएगी और इन-हैंड पैसे कम हो जाएंगे।
PF की 15,000 रुपये सीमा कैसे बचा रही कर्मचारियों की सैलरी?
वर्तमान नियमों के तहत, PF में अनिवार्य योगदान 15,000 रुपये के बेसिक वेतन पर ही होता है। यानी यदि कर्मचारी का बेसिक वेतन इससे ज्यादा भी हो, तो PF की गणना 15,000 पर ही की जा सकती है।
- कर्मचारी का PF: 12%
- नियोक्ता का PF: 12%
यदि कंपनी और कर्मचारी दोनों इस सीमा पर सहमत रहते हैं, तो PF में कटौती बढ़ती नहीं है और टेक-होम में भी कोई कमी नहीं आती। विशेषज्ञों का कहना है कि नई लेबर कोड्स में इस सीमा को बदलने का कोई संकेत नहीं है, इसलिए ज्यादातर कर्मचारियों पर असर नहीं होगा।
नई श्रम संहिताओं का उद्देश्य क्या है?
चारों श्रम संहिताओं का लक्ष्य देश की श्रम व्यवस्थाओं को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है। इनमें शामिल हैं—
- वेतन संहिता (Code on Wages, 2019)
- औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code, 2020)
- सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code, 2020)
- व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थितियां संहिता (OSH Code, 2020)
इनका मकसद कार्यस्थल पर सुरक्षा, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और श्रम नियमों को सुव्यवस्थित करना है।
क्या टेक-होम सैलरी पर पड़ सकता है कोई अप्रत्यक्ष असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- यदि कोई कंपनी PF की गणना 15,000 की सीमा पर ही करती है, तो कोई बदलाव नहीं होगा।
- लेकिन अगर कंपनी वास्तविक बेसिक सैलरी (जो नई संहिता के चलते 50% या उससे अधिक हो सकती है) पर PF लागू करती है, तो कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी घट सकती है।
- कुछ कंपनियां कर्मचारियों की सलाह लेकर दो में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकती हैं।
कंपनियों के लिए क्या बदल सकता है?
नई संहिताओं से कंपनियों को अपने वेतन ढांचे को नियमों के अनुरूप पुन: व्यवस्थित करना होगा।
- कई कंपनियों को allowances कम करने और बेसिक सैलरी बढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
- हालांकि PF कटौती की 15,000 रुपये सीमा बरकरार रहने के कारण कंपनियों के वित्तीय बोझ में बड़ा बदलाव नहीं होगा।
कर्मचारियों के लिए राहत क्यों?
कई कर्मचारियों को लगता था कि नई संहिता लागू होते ही उनकी इन-हैंड सैलरी में अचानक भारी कमी आ जाएगी। लेकिन PF सीमा जैसे ही बनी रहती है—
- कर्मचारी का मासिक PF योगदान नहीं बढ़ेगा
- इन-हैंड सैलरी सुरक्षित रहेगी
- रिटायरमेंट फंड में वृद्धि स्थिर रहेगी
नई श्रम संहिताएं लागू हों या न हों, यदि EPFO की 15,000 रुपये PF बेसिक सीमा यथावत रहती है, तो कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में भी अधिकतर कर्मचारियों की सैलरी पहले जैसी ही मिलेगी और PF कटौती से जुड़ी चिंताएं काफी हद तक निराधार साबित होती हैं।
