By: Ravindra Sikarwar
केंद्र सरकार ने 21 नवंबर को देश में चार नए लेबर कोड लागू करते हुए श्रमिकों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। इन बदलावों का असर फैक्ट्री कर्मचारियों से लेकर गिग वर्कर्स, कॉन्ट्रेक्ट स्टाफ और MSME सेक्टर के कर्मचारियों तक व्यापक रूप से पड़ेगा। सरकार का दावा है कि नए कोड से सभी तरह के श्रमिकों को अधिक सुरक्षा, बेहतर वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
1 साल में ग्रेच्युटी और FTA कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों जैसे लाभ
नए नियमों के अनुसार फिक्स्ड-टर्म एंप्लॉयीज (FTA) को अब सिर्फ एक साल की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। पहले यह सुविधा केवल 5 साल काम करने पर मिलती थी। हालांकि, स्थायी कर्मचारियों के लिए 5 साल की शर्त लागू रहेगी। इसके अलावा FTA को छुट्टियों, मेडिकल सुविधा और सोशल सिक्योरिटी जैसे सभी लाभ स्थायी कर्मचारियों के बराबर दिए जाएंगे।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार सामाजिक सुरक्षा
डिलीवरी पार्टनर, टैक्सी ड्राइवर और अन्य ऐप-आधारित कर्मचारियों को पहली बार लेबर कोड में ‘गिग वर्कर’ और ‘प्लेटफॉर्म वर्कर’ के रूप में मान्यता दी गई है। अब एग्रीगेटर कंपनियों को अपने सालाना कारोबार का 1–2% इन वर्कर्स की कल्याण योजनाओं पर खर्च करना होगा। साथ ही, इन्हें आधार से लिंक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) दिया जाएगा, जिससे देशभर में काम बदलने पर भी उनकी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जारी रहेंगी।
महिला कर्मचारियों के लिए समान वेतन और सुरक्षा व्यवस्था
नए लेबर कोड में महिलाओं के लिए ‘समान काम पर समान वेतन’ का प्रावधान अनिवार्य किया गया है। अब लैंगिक भेदभाव को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। महिलाएं अपनी सहमति से नाइट शिफ्ट, खदान या भारी मशीनों पर भी काम कर सकेंगी, बशर्ते सुरक्षा सुनिश्चित हो। शिकायत निवारण समितियों में महिला प्रतिनिधि अनिवार्य होंगे, जबकि माता-पिता और सास-ससुर को भी आश्रित मानकर सुरक्षा दायरा बढ़ाया गया है।
कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स, MSME और युवा श्रमिकों को भी राहत
कॉंट्रेक्ट कर्मचारियों को अब मेडिकल और सोशल सिक्योरिटी लाभ मिलेंगे, साथ ही हर साल मुफ्त हेल्थ चेकअप भी अनिवार्य किया गया है। MSME सेक्टर में काम करने वाले श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा कानूनों का लाभ मिलेगा। नए कोड के अनुसार सभी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी की गारंटी, ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन, समय पर सैलरी और नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा।
अन्य सुधार और विवादों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था
नए लेबर कोड में इंस्पेक्शन सिस्टम बदलकर ‘इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर’ मॉडल लागू किया गया है, जिसके तहत पहले श्रमिकों और कंपनियों को जानकारी और मदद दी जाएगी। विवादों के समाधान के लिए दो-सदस्यीय औद्योगिक न्यायाधिकरण बनाए गए हैं। सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय OSH बोर्ड का गठन किया गया है और 500 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में सेफ्टी कमेटी अनिवार्य होगी।
