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By: Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में एक छोटा-सा पड़ोसी विवाद अब सांप्रदायिक तनाव का रूप ले चुका है। यहां की मुस्लिम बहुल बस्ती में रहने वाले एक हिंदू परिवार को निशाना बनाते हुए एक मुस्लिम परिवार ने उनके घर पर धावा बोल दिया। इस घटना में दो युवक बुरी तरह जख्मी हो गए, और पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले ने स्थानीय समुदायों के बीच पहले से चल रही अनबन को और भड़का दिया है, जिसकी जड़ें पिछले तीन महीनों से चली आ रही हैं।

घटना मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे अशोक विहार कॉलोनी में घटी। पीड़ित परिवार के मुखिया अर्जुन यादव के घर में सलीम, शबनम, नायाब और उनके अन्य रिश्तेदार अचानक घुस आए। आरोप है कि हमलावरों ने पत्थरों, लोहे की रॉड और डंडों से हमला किया, जिससे अर्जुन यादव के दो बेटे कार्तिक और अनुज गंभीर रूप से घायल हो गए। डॉक्टरों के अनुसार, उनके सिर पर लगी चोटें इतनी गंभीर हैं कि उनकी जान को खतरा हो सकता है। हमले के दौरान घर में तोड़फोड़ भी की गई, और परिवार के सदस्यों को धमकियां दी गईं। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी, और स्थानीय निवासियों ने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया।

पुलिस के अनुसार, यह विवाद कोई नया नहीं है। दोनों परिवारों के बीच पिछले तीन-चार महीनों से छोटी-मोटी कहासुनी चल रही थी, जो मुख्य रूप से बच्चों के झगड़ों से शुरू हुई थी। पहले भी यह मामला अशोका गार्डन थाने पहुंचा था, लेकिन थाना प्रभारी ने इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। नतीजतन, तनाव बढ़ता गया और अब यह हिंसक रूप ले चुका है। सहायक पुलिस आयुक्त हबीबगंज उमेश तिवारी ने बताया कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गाली-गलौज, मारपीट, धमकी देने, घर में अनधिकृत प्रवेश और हत्या के प्रयास के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। इस प्रकरण में चार नाबालिग लड़के भी शामिल थे, जिन्हें विधि-विरुद्ध गतिविधियों के तहत हिरासत में लिया गया है। सभी आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं, और जांच जारी है।

घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से फैली। मंगलवार रात को ही वीडियो और तस्वीरें वायरल हो गईं, जिससे स्थानीय हिंदू संगठन सक्रिय हो गए। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी अपने समर्थकों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से बात की। अर्जुन यादव ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर पहले ही सख्ती बरती जाती तो यह नौबत नहीं आती। इसके बाद समिति के सदस्यों ने अशोका गार्डन थाने का घेराव किया और प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, वरना वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। चंद्रशेखर तिवारी ने इस घटना को “लैंड जिहाद” का नाम देने से इनकार किया, लेकिन कहा कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र में रहने वाले हिंदू परिवारों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि सलीम का परिवार अर्जुन यादव को इलाके से भगाना चाहता है ताकि उनकी संपत्ति पर कब्जा कर सके।

इस मामले ने भोपाल में सांप्रदायिक सद्भाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अशोका गार्डन जैसे इलाकों में विभिन्न समुदायों के लोग सदियों से साथ रहते आए हैं, लेकिन छोटे-छोटे विवादों को नजरअंदाज करने से वे बड़े रूप ले लेते हैं। पुलिस अधिकारी उमेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि यह कोई सांप्रदायिक षड्यंत्र नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत झगड़ों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों से बात की गई है, और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इलाके में गश्त बढ़ाई जाएगी। थाना प्रभारी अनुराग लाल भी हमीदिया अस्पताल पहुंचे, जहां घायलों का इलाज चल रहा है, और उन्होंने परिवार को सुरक्षा का आश्वासन दिया।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव के मुद्दे चर्चा में हैं। मध्य प्रदेश में भी हाल के महीनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां पड़ोसी विवादों ने धार्मिक रंग ले लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की शुरुआती लापरवाही ऐसे मामलों को बढ़ावा देती है। अगर समय रहते मध्यस्थता की जाती तो शायद यह हिंसा टल सकती थी। हिंदू उत्सव समिति ने पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि अगर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।

पीड़ित परिवार के सदस्यों ने बताया कि वे कई सालों से इस कॉलोनी में रह रहे हैं, लेकिन हाल में मुस्लिम पड़ोसियों से बढ़ते दबाव के कारण असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अर्जुन यादव ने कहा कि उनके बच्चों को स्कूल जाते समय धमकियां मिलती हैं, और घर के बाहर अक्सर झगड़े होते हैं। इस घटना के बाद परिवार अब इलाका छोड़ने पर विचार कर रहा है, लेकिन वे न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है, और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

इस तरह की घटनाएं समाज में विभाजन पैदा करती हैं, और जरूरी है कि स्थानीय प्रशासन और समुदाय नेता मिलकर ऐसे विवादों को सुलझाएं। भोपाल पुलिस ने वादा किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी, और दोषियों को सजा मिलेगी। उम्मीद है कि यह घटना सबक बनेगी, और आगे ऐसी हिंसा से बचा जा सकेगा।