by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन और ऐप्स की वजह से किसी की कॉल रिकॉर्ड करना बेहद आसान हो गया है, लेकिन क्या यह कानूनी रूप से सही है? खासकर जब आपका करीबी दोस्त, पार्टनर या बॉयफ्रेंड आपकी अनुमति के बिना आपकी निजी बातचीत को रिकॉर्ड कर ले। भारत में यह एक गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए सख्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। हाल ही में कई मामले सामने आए हैं जहां रिश्तों में विश्वासघात के चलते कॉल रिकॉर्डिंग का सहारा लिया गया, जिसके बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह क्यों गैरकानूनी है, क्या सजा हो सकती है और खुद को कैसे सुरक्षित रखें।
कानूनी आधार: निजता का अधिकार और संविधान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को निजता का अधिकार प्राप्त है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के ऐतिहासिक जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामले में मौलिक अधिकार घोषित किया। इसमें निजी बातचीत, फोन कॉल और मैसेज शामिल हैं। किसी की सहमति के बिना उसकी बातचीत रिकॉर्ड करना इस अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आईटी एक्ट) की धारा 66E, 66C और 72A इस तरह के कृत्यों को दंडनीय बनाती है:
- धारा 66E: निजी क्षेत्र की तस्वीर या वीडियो बिना अनुमति कैद करना या प्रसारित करना।
- धारा 72A: विश्वास के उल्लंघन में निजी जानकारी (जैसे कॉल रिकॉर्डिंग) का खुलासा करना।
- धारा 67: अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने पर सजा।
यदि रिकॉर्डिंग में निजी, संवेदनशील या अंतरंग बातें हैं, तो यह आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की निम्न धाराओं के तहत भी अपराध है:
- धारा 354C (वॉयरिज्म): किसी महिला की निजता का उल्लंघन।
- धारा 499/500 (मानहानि): यदि रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक किया जाए।
- धारा 509: महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना।
- धारा 292/293: अश्लील सामग्री का प्रसार।
क्या कहता है टेलीग्राफ एक्ट?
भारतीय टेलीग्राफ एक्ट, 1885 की धारा 25 स्पष्ट रूप से कहती है कि बिना वैध प्राधिकार के टेलीफोनिक संदेश को इंटरसेप्ट (रोकना) या रिकॉर्ड करना अवैध है। केवल सरकारी एजेंसियां (जैसे पुलिस, एनआईए) कोर्ट के आदेश या राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर ही ऐसा कर सकती हैं। निजी व्यक्ति के लिए यह पूरी तरह प्रतिबंधित है।
अपराध की परिभाषा: सहमति क्यों जरूरी?
कानून के अनुसार, दोनों पक्षों की स्पष्ट सहमति आवश्यक है। यदि आप बातचीत में हैं और दूसरा व्यक्ति आपको बता दे कि “मैं कॉल रिकॉर्ड कर रहा हूं”, तब यह वैध हो सकता है (जैसे कॉल सेंटर में)। लेकिन छिपकर रिकॉर्ड करना अवैध इंटरसेप्शन कहलाता है। यहां तक कि अगर आपका पार्टनर कहे कि “मैंने मजाक में रिकॉर्ड किया”, तब भी यह अपराध है।
सजा और कानूनी परिणाम:
यदि कोई आपकी सहमति के बिना कॉल रिकॉर्ड करता है:
- आईटी एक्ट के तहत:
– पहली बार अपराध: 3 साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
– यदि रिकॉर्डिंग लीक हो: 7 साल तक कैद।
- आईपीसी के तहत:
– मानहानि: 2 साल कैद या जुर्माना।
– वॉयरिज्म: 3 से 7 साल कैद।
- सिविल मुकदमा: पीड़ित नुकसान के लिए मुआवजा मांग सकता है।
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा कि “रिश्ते में विश्वास की आड़ में निजता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
वास्तविक मामले और उदाहरण:
- 2024, मुंबई: एक युवती ने अपने बॉयफ्रेंड पर आरोप लगाया कि उसने अंतरंग बातचीत रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल किया। पुलिस ने आईटी एक्ट और आईपीसी 354D (स्टॉकिंग) के तहत केस दर्ज किया। आरोपी को 6 महीने की सजा हुई।
- 2025, बेंगलुरु: पति ने पत्नी की कॉल रिकॉर्ड कर तलाक केस में पेश की। कोर्ट ने रिकॉर्डिंग को अवैध सबूत माना और पति पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
- सोशल मीडिया ट्रेंड: कई युवा “प्रैंक कॉल रिकॉर्डिंग” वीडियो अपलोड करते हैं, लेकिन पुलिस अब इन्हें ट्रैक कर रही है।
कैसे पता करें कि कॉल रिकॉर्ड हो रही है?
कई संकेत हो सकते हैं:
- कॉल के दौरान बीप ध्वनि (कुछ ऐप्स में)।
- फोन गर्म होना या बैटरी जल्दी खत्म होना।
- अज्ञात ऐप्स इंस्टॉल होना (जैसे Cube ACR, Call Recorder)।
- पार्टनर का असामान्य व्यवहार (बातचीत दोहराना)।
जांच के तरीके:
- फोन में सेटिंग्स > ऐप्स > परमिशन > माइक्रोफोन चेक करें।
- डायल कोड: ##001## या *#62# डायल करें (कुछ फोनों में)।
- थर्ड-पार्टी ऐप्स जैसे Anti Spy Mobile इस्तेमाल करें।
खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
- स्पष्ट संवाद: पार्टनर से कहें, “कॉल रिकॉर्ड मत करना।”
- ऐप्स ब्लॉक करें: फोन में कॉल रिकॉर्डर ऐप्स डिलीट करें।
- दो-तरफा सहमति: महत्वपूर्ण कॉल में कहें, “क्या आप रिकॉर्ड कर रहे हैं?”
- शिकायत दर्ज करें:
– साइबर सेल: cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत।
– पुलिस: स्थानीय थाने में एफआईआर।
– महिला हेल्पलाइन: 1091 या 181।
- कानूनी मदद: वकील से संपर्क करें, सबूत (स्क्रीनशॉट, मैसेज) सहेजें।
विशेषज्ञों की राय:
साइबर लॉ विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं, “रिश्ते में विश्वास जरूरी है, लेकिन निजता का अधिकार उससे ऊपर है। छिपकर रिकॉर्डिंग करना न केवल अपराध है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न भी।”
मनोवैज्ञानिक डॉ. समीर चौधरी कहते हैं, “ऐसे कृत्य रिश्ते में अविश्वास पैदा करते हैं और पीड़ित को डिप्रेशन तक ले जा सकते हैं।”
निजता का सम्मान करें:
कोई भी रिश्ता हो – दोस्ती, प्यार या शादी – निजता का उल्लंघन अपराध है। यदि आपको शक है कि आपकी कॉल रिकॉर्ड की जा रही है, तो तुरंत कार्रवाई करें। कानून आपके साथ है। जागरूक रहें, सुरक्षित रहें।
हेल्पलाइन:
- राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन: 1930
- महिला हेल्पलाइन: 1091
- कानूनी सहायता: legalAid.gov.in
यह लेख केवल जागरूकता के लिए है। किसी भी कानूनी कदम से पहले वकील से सलाह लें।
