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इछावर विधानसभा में शिक्षक-छात्र अनुपात और स्कूलों की निगरानी पर उठे सवाल

इछावर। इछावर विधानसभा क्षेत्र की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक-छात्र अनुपात को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय व्यवस्था और स्कूलों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर क्षेत्र के कुछ सरकारी स्कूलों में 60 से अधिक विद्यार्थियों की जिम्मेदारी एक शिक्षक के भरोसे होने की बात सामने आ रही है, वहीं शिकारपुर गांव के प्राथमिक शासकीय स्कूल में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या महज छह बताई जा रही है और यहां तीन शिक्षक पदस्थ हैं।

शिकारपुर स्थित स्कूल में जब स्वदेश न्यूज की टीम पहुंची तो तीनों शिक्षक स्कूल परिसर में मौजूद थे, लेकिन निरीक्षण के दौरान एक भी विद्यार्थी दिखाई नहीं दिया। ऐसे में स्कूल में दर्ज छह विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि बच्चों के स्कूल नहीं पहुंचने के वास्तविक कारण और उनकी उपस्थिति से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड की स्थिति शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

शिक्षक-छात्र अनुपात पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल शिक्षक व्यवस्था को लेकर है। जहां अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में शिक्षकों की कमी की बात सामने आती है, वहीं कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों में अपेक्षाकृत अधिक शिक्षक पदस्थ होने की स्थिति शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण व्यवस्था पर चर्चा को मजबूती देती है।

जरूरत इस बात की है कि विभाग सभी सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या और शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता का तुलनात्मक आकलन करे। इससे यह पता चल सकेगा कि किन विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षक हैं और किन स्कूलों में शिक्षकों की आवश्यकता अधिक है।

स्कूल में रखी सामग्री के इस्तेमाल पर भी सवाल

स्कूल परिसर में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए कुर्सियां, टेबल और अन्य सामग्री करीब दो महीने से रखे होने की बात भी सामने आई है। यदि यह सामग्री विद्यार्थियों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराई गई है तो उसके इस्तेमाल की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

इस संबंध में यह भी सवाल उठता है कि क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण के दौरान स्कूल में उपलब्ध संसाधनों के उपयोग की स्थिति की समीक्षा की जाती है।

रिकॉर्ड की जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति

मामले में विद्यार्थियों की उपस्थिति रजिस्टर, शिक्षकों की उपस्थिति, स्कूल में उपलब्ध संसाधनों और निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। आधिकारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्कूल में विद्यार्थियों की अनुपस्थिति की वजह क्या है और शिक्षक-छात्र अनुपात विभागीय मानकों के अनुरूप है या नहीं।

यह मामला किसी एक शिक्षक पर आरोप लगाने के बजाय सरकारी स्कूलों में संसाधनों के उचित वितरण, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और विभागीय निगरानी की व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को सामने रखता है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या जांच करता है और सामने आए सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।