by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: विश्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि 2011-12 में जहां यह दर 27.1% थी, वहीं 2022-23 में यह घटकर मात्र 5.3% रह गई है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसने लगभग 269 मिलियन (26.9 करोड़) लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है।
गरीबी रेखा का बदला हुआ पैमाना:
यह गिरावट आंशिक रूप से विश्व बैंक द्वारा अपनी अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा को संशोधित करने के कारण भी है। पहले यह पैमाना प्रतिदिन $2.15 (2017 की कीमतों के आधार पर) था, जिसे अब बढ़ाकर प्रतिदिन $3.00 (2021 की कीमतों के आधार पर) कर दिया गया है। इस नए और अधिक कठोर मानदंड के बावजूद, भारत ने गरीबी उन्मूलन में जबरदस्त प्रगति दिखाई है।
प्रमुख आंकड़े और रुझान:
- पूर्ण संख्या में कमी: 2011-12 में भारत में लगभग 344.47 मिलियन (34.47 करोड़) लोग अत्यधिक गरीबी में जी रहे थे, जो 2022-23 में घटकर 75.24 मिलियन (7.52 करोड़) रह गए हैं।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान गिरावट: यह गिरावट ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक रूप से देखी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक गरीबी 2011-12 में 18.4% से घटकर 2022-23 में 2.8% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 10.7% से घटकर 1.1% रह गई।
- प्रमुख राज्यों का योगदान: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश, जो 2011-12 में भारत के कुल अत्यधिक गरीबों का 65% हिस्सा थे, उन्होंने 2022-23 तक अत्यधिक गरीबी में कुल गिरावट का दो-तिहाई योगदान दिया। हालांकि, इन राज्यों में अभी भी भारत के कुल अत्यधिक गरीबों का 54% हिस्सा रहता है।
- बहुआयामी गरीबी में कमी: मौद्रिक उपायों के अलावा, भारत ने बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) को कम करने में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI), जो शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर जैसे कारकों को ध्यान में रखता है, 2005-06 में 53.8% से घटकर 2019-21 तक 16.4% हो गया और 2022-23 में यह और घटकर 15.5% रह गया।
- निम्न-मध्यम-आय श्रेणी: विश्व बैंक ने निम्न-मध्यम-आय श्रेणी (Lower-Middle-Income Category – LMIC) के लिए भी गरीबी रेखा को $3.65 प्रति दिन से संशोधित कर 2021 की कीमतों पर $4.20 प्रति दिन कर दिया है। इस मानदंड के अनुसार, 2011-12 में 57.7% भारतीय इस श्रेणी से नीचे थे, जो 2022-23 में घटकर 23.9% रह गए। पूर्ण संख्या में यह कमी 732.48 मिलियन से 342.32 मिलियन तक हुई है।
सरकार की भूमिका और नीतियां:
यह महत्वपूर्ण उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा पिछले एक दशक में गरीबी उन्मूलन के लिए उठाए गए पथप्रदर्शक कदमों और सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचे और समावेशन पर केंद्रित नीतियों का परिणाम है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PM Ujjwala Yojana), जन धन योजना (Jan Dhan Yojana) और आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat) जैसी पहलों ने आवास, स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाई है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer – DBT), डिजिटल समावेशन और मजबूत ग्रामीण बुनियादी ढांचे ने पारदर्शिता और अंतिम मील तक लाभों की तेज डिलीवरी सुनिश्चित की है, जिससे 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिली है।
आगे की राह:
जहां भारत ने गरीबी उन्मूलन में प्रभावशाली प्रगति की है, वहीं विश्व बैंक शिक्षा, स्वच्छता और औपचारिक रोजगार में निरंतर सुधारों के महत्व पर जोर देता है ताकि गरीबी में कमी को स्थायी बनाया जा सके। ये आंकड़े भारत के विकास पथ में एक सकारात्मक संकेत देते हैं और समावेशी विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता को उजागर करते हैं।
