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by-Ravindra Sikarwar

एक ताज़ा वैज्ञानिक अध्ययन ने दावा किया है कि महिलाएँ पुरुषों के मुकाबले लगभग तीन गुना ज़्यादा भुलक्कड़ हो सकती हैं। यह शोध नॉर्वे की एक प्रमुख यूनिवर्सिटी में किया गया, जहाँ ४८,००० से अधिक लोगों पर नौ अलग-अलग मेमोरी टेस्ट करवाए गए। परिणामों से पता चला कि याददाश्त से जुड़े सवालों में महिलाएँ पुरुषों से काफी पीछे रहीं।

अध्ययन की मुख्य खोजें:

  • भुलक्कड़पन का स्तर: शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाएँ औसतन पुरुषों की तुलना में ३ गुना अधिक बार चीजें भूलती हैं, जैसे नाम याद रखना, जगहें ढूंढना या हाल की घटनाओं को याद करना।
  • उम्र का प्रभाव: यह अंतर सभी आयु वर्गों में देखा गया, लेकिन ६० साल से ऊपर की महिलाओं में यह और भी स्पष्ट था।
  • टेस्ट के प्रकार: प्रयोगों में शामिल थे – शब्दों की सूची याद करना, चेहरों को पहचानना, और दैनिक जीवन की छोटी-छोटी बातें स्मरण करना। हर कैटेगरी में महिलाओं का स्कोर कम रहा।

कारण क्या हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मुख्य कारण हार्मोनल बदलाव हो सकता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर जीवन भर उतार-चढ़ाव करता रहता है, खासकर मासिक धर्म, गर्भावस्था और मेनोपॉज के दौरान। ये बदलाव ब्रेन के हिप्पोकैंपस क्षेत्र को प्रभावित करते हैं, जो याददाश्त के लिए जिम्मेदार होता है।

दूसरा बड़ा फैक्टर है मल्टीटास्किंग। महिलाएँ अक्सर घर, काम और परिवार की जिम्मेदारियाँ एक साथ निभाती हैं, जिससे दिमाग पर बोझ बढ़ता है और छोटी बातें भूलने की संभावना बढ़ जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएँ तनाव भी ज़्यादा लेती हैं, जो मेमोरी को कमजोर बनाता है।

क्या यह हमेशा सच है?
शोधकर्ता साफ कहते हैं कि यह औसत आंकड़े हैं, हर महिला भुलक्कड़ नहीं होती। कुछ महिलाएँ पुरुषों से बेहतर मेमोरी रखती हैं। इसके अलावा, जीवनशैली सुधारकर – जैसे नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और ध्यान लगाने की प्रैक्टिस – कोई भी अपनी याददाश्त मजबूत कर सकता है।

यह अध्ययन ‘बीएमसी साइकोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है और भविष्य में मेमोरी से जुड़ी बीमारियों जैसे अल्जाइमर की रोकथाम के लिए नई दवाएँ विकसित करने में मदद कर सकता है।

सुधार के आसान टिप्स:

  1. रोज़ ३० मिनट वॉक करें।
  2. मेडिटेशन या योग अपनाएँ।
  3. नोट्स बनाकर महत्वपूर्ण काम याद रखें।
  4. स्वस्थ आहार लें, जिसमें ओमेगा-३ फैटी एसिड वाले फूड शामिल हों।

यह रिसर्च हमें याद दिलाती है कि याददाश्त लिंग से ज्यादा जीवनशैली और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।

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