by-Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक बेहद निंदनीय घटना ने समाज को झकझोर दिया है। एक स्वास्थ्य केंद्र के शवगृह में एक युवक ने एक महिला के शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया, जिसमें छेड़छाड़ और शव को घसीटने जैसी घृणित हरकतें शामिल हैं। यह घटना अप्रैल 2024 में हुई थी, लेकिन एक वर्ष बाद अक्टूबर 2025 में सीसीटीवी फुटेज के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन यह मामला स्वास्थ्य सुविधाओं की सुरक्षा व्यवस्था और नैतिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना का विवरण और समय-स्थान:
यह दिल दहला देने वाली घटना 18 अप्रैल 2024 को सुबह करीब 6:45 बजे खकनार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के शवगृह कक्ष में घटी। बुरहानपुर जिले के खकनार क्षेत्र में स्थित यह स्वास्थ्य केंद्र जिले के ग्रामीण इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है। मृतक महिला का शव पोस्टमार्टम के लिए रखा गया था। पुलिस जांच के अनुसार, महिला ने आत्महत्या की थी, लेकिन उसके परिजनों को शव सौंपने से पहले यह अमानवीय कृत्य हो गया।
आरोपी ने स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती एक मरीज के लिए भोजन लेकर प्रवेश किया था। वह एक सामान्य आगंतुक के रूप में अंदर घुसा और सीधे शवगृह कक्ष पहुंच गया। वहां रखे स्ट्रेचर पर महिला का शव देखते ही उसने चारों ओर नजर दौड़ाई, फिर शव के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। न केवल इतना, बल्कि उसने शव को स्ट्रेचर से उतारा, कुछ दूर घसीटा और फिर वापस रख दिया। पूरी घटना करीब 20 मिनट तक चली, जिसमें वह शव को इधर-उधर ले जाता दिखा। सीसीटीवी कैमरे ने इस पूरी घटना को कैद कर लिया, जो बाद में सबूत के रूप में सामने आया।
आरोपी की पहचान और पृष्ठभूमि:
आरोपी का नाम नीलेश भीलाला है, जो 25 वर्षीय युवक है और बुरहानपुर जिले के भोहागढ़ क्षेत्र के तंगियापाट गांव का निवासी है। पुलिस पूछताछ में उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। जांच में पता चला कि नीलेश ने अस्पताल में सुरक्षा के ढीलापन का फायदा उठाया। वह मरीज के परिजन के रूप में रजिस्टर में दर्ज था, लेकिन शवगृह कक्ष तक पहुंचने का तरीका अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, नीलेश का इलाके में कोई आपराधिक इतिहास नहीं था, लेकिन यह घटना उसके चरित्र पर गंभीर सवाल उठाती है।
मृतक महिला की पहचान गोपनीय रखी गई है, लेकिन परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह जिले के एक ग्रामीण इलाके की रहने वाली थीं। आत्महत्या के पीछे पारिवारिक या आर्थिक दबाव हो सकते हैं, लेकिन पुलिस ने इसकी अलग से जांच की है। परिवार ने घटना पर गहरा आघात व्यक्त किया है और स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
घटना का खुलासा और शिकायत:
यह घटना एक वर्ष तक दबे रहने के बाद 7 अक्टूबर 2025 को तब सामने आई, जब पुराना सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आद्या दावर ने वीडियो की प्रामाणिकता की जांच के लिए एक तकनीकी टीम गठित की। टीम ने फुटेज की सत्यता की पुष्टि की और अस्पताल के रिकॉर्ड—जैसे मरीजों की एंट्री, आगंतुकों का लॉग और सीसीटीवी फाइलें—की समीक्षा की। इसके बाद डॉ. दावर ने उसी शाम खकनार थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
जिला कलेक्टर हर्ष सिंह को मामले की जानकारी मिलते ही उन्होंने एक जांच समिति का गठन किया, जिसने अस्पताल का स्थलीय निरीक्षण किया। समिति ने पाया कि शवगृह कक्ष की सुरक्षा में चूक थी, जैसे ताले न लगे होना और रात्रिकालीन गश्त की कमी। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया:
खकनार पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 297 के तहत मामला दर्ज किया, जो मानव शव का अपमान और अपवित्रता से संबंधित अपराध को कवर करती है। थाना प्रभारी अभिषेक जाधव के नेतृत्व में एक टीम ने वीडियो के आधार पर आरोपी की पहचान की। पुराने फुटेज के बावजूद, आगंतुक रजिस्टर और अन्य रिकॉर्ड से नीलेश को ट्रेस किया गया। उसे गिरफ्तार कर बुरहानपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जमानत अस्वीकार हो गई।
पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पटिदार और उपमंडल पुलिस अधिकारी निर्भय सिंह अलावा ने जांच को तेज करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंतरा सिंह कनेस ने बताया, “आरोपी ने पूछताछ में अपराध स्वीकार किया है। हम यह भी जांच रहे हैं कि वह शवगृह तक कैसे पहुंचा और क्या कोई अन्य व्यक्ति शामिल था।” थाना प्रभारी जाधव ने कहा, “आरोपी हिरासत में है और आगे की पूछताछ जारी है। अतिरिक्त आरोप लगाए जा सकते हैं।” पुलिस ने अस्पताल प्रशासन को सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है।
व्यापक प्रभाव और सबक:
यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत अपराध है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सुरक्षा की कमी को उजागर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में शवगृह जैसी संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी तो हैं, लेकिन उनकी निगरानी और रखरखाव की कमी गंभीर समस्या पैदा कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में तत्काल जांच और सख्त सजा की जरूरत है, ताकि अपराधियों को सबक मिले। महिला सुरक्षा और मृतकों के सम्मान के संदर्भ में यह घटना समाज के लिए चेतावनी है।
परिवार और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि आरोपी को कड़ी सजा दी जाए और स्वास्थ्य केंद्र पर लापरवाही का मुकदमा चलाया जाए। राज्य सरकार ने भी मामले को संज्ञान में ले लिया है और सभी सरकारी अस्पतालों में शवगृह सुरक्षा के नए दिशानिर्देश जारी करने की योजना बना रही है।
न्याय की अपेक्षा:
यह अमानवीय घटना मानवता के मूल्यों पर करारा प्रहार है। मृतक महिला का परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है, जबकि समाज को यह सोचने का समय है कि कैसे ऐसी त्रासदियों को रोका जाए। सख्त कानूनी कार्रवाई और बेहतर सुरक्षा उपाय ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं। उम्मीद है कि न्याय प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और दोषी को सजा मिलेगी, ताकि पीड़ित परिवार को थोड़ी शांति मिल सके।
