by-Ravindra Sikarwar
दिल्ली के मशहूर ताज महल होटल के एक रेस्तरां में एक महिला से “सीधे बैठने” को कहे जाने का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। महिला ने इस घटना को लेकर होटल प्रबंधन की आलोचना की और अपने अनुभव का वीडियो साझा किया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या है पूरा मामला?
घटना दिल्ली के ताज महल होटल स्थित फाइन डाइनिंग रेस्तरां ‘हाउस ऑफ मिंग’ की है।
श्रद्धा शर्मा, जो एक जानी-मानी मीडिया उद्यमी और YourStory की संस्थापक हैं, अपनी बहन के साथ दिवाली के अवसर पर डिनर के लिए यहां गई थीं।
श्रद्धा ने बताया कि वह कुर्सी पर पारंपरिक पद्मासन मुद्रा (पैर मोड़कर) में बैठी थीं, तभी रेस्तरां के एक मैनेजर ने उनसे कहा कि “मैडम, कृपया सीधे बैठिए, अन्य मेहमान असहज महसूस कर रहे हैं।”
श्रद्धा के अनुसार, उन्होंने सलवार-कमीज़ और कोल्हापुरी चप्पल पहनी थी। लेकिन रेस्तरां स्टाफ ने कहा कि “यह एक फाइन डाइनिंग जगह है, यहां बैठने और पहनावे का एक विशेष शिष्टाचार होता है।”
महिला ने जताई नाराज़गी:
इस पर श्रद्धा शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा —
“मैं अपनी बहन के साथ डिनर के लिए गई थी। मैंने मेहनत से कमाए पैसों से इस रेस्तरां में खाने का खर्च उठाया, लेकिन वहां मुझे सिखाया गया कि कैसे बैठना चाहिए और क्या पहनना चाहिए। क्या अब हमें खाने के लिए भी क्लास और मुद्रा देखकर आंका जाएगा?”
उन्होंने आगे लिखा कि उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी ईमानदारी से काम किया है और आत्मसम्मान के साथ जीना सीखा है, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें अपमानित महसूस कराया।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं:
वीडियो वायरल होते ही इंटरनेट पर दो तरह की राय सामने आईं।
कुछ लोगों ने श्रद्धा का समर्थन करते हुए कहा कि किसी के बैठने के तरीके या पहनावे पर टिप्पणी करना “अभद्र” और “क्लास बायस्ड” व्यवहार है।
वहीं, कुछ उपयोगकर्ताओं का कहना था कि फाइन डाइनिंग रेस्तरां में बैठने और व्यवहार के कुछ तय मानक होते हैं — और मैनेजर ने केवल उन्हीं नियमों के अनुरूप बात की।
एक यूजर ने लिखा: “अगर आप किसी फाइव स्टार होटल में हैं, तो वहां के आचार-विचार का भी ध्यान रखना चाहिए। हर जगह अपनी एक संस्कृति होती है।”
दूसरे यूजर ने लिखा: “यह मामला केवल शिष्टाचार का नहीं, बल्कि सामाजिक विभाजन का है — जहां किसी के कपड़ों और मुद्रा से उसकी सामाजिक स्थिति तय की जाती है।”
होटल प्रबंधन की चुप्पी:
अब तक ताज होटल या ‘हाउस ऑफ मिंग’ रेस्तरां की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
हालांकि, कई लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से यह सवाल खड़ा होता है कि क्या “ड्रेस कोड” और “बॉडी लैंग्वेज” के नाम पर ग्राहकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सीमित की जा सकती है?
निष्कर्ष:
यह घटना केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि समाज में मौजूद क्लास डिफरेंस, संस्कृति बनाम आधुनिकता और शिष्टाचार की परिभाषा पर नई बहस छेड़ गई है।
श्रद्धा शर्मा के अनुसार, “सम्मान इस बात से तय नहीं होना चाहिए कि कोई कैसे बैठता है या क्या पहनता है, बल्कि इस बात से कि वह व्यक्ति दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करता है।”
