by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में एक नई क्रांति की शुरुआत हो रही है, जहां ओपनएआई ने गुप्त रूप से ‘प्रोजेक्ट मर्क्यूरी’ नामक परियोजना लॉन्च की है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य निवेश बैंकिंग क्षेत्र में जूनियर स्तर के कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले दोहराव वाले और समय लेने वाले कार्यों को स्वचालित करना है। 21 अक्टूबर 2025 को ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में इसकी जानकारी सामने आई, जिसमें बताया गया कि ओपनएआई ने जेपी मॉर्गन, गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टैनली जैसे प्रमुख बैंकों के पूर्व कर्मचारियों को भर्ती किया है। यह कदम वित्तीय क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ावा देगा, लेकिन साथ ही जूनियर बैंकरों की नौकरियों पर खतरा भी पैदा कर सकता है। ओपनएआई, जो चैटजीपीटी के लिए जाना जाता है, अब वित्त, कानून और परामर्श जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक एआई टूल्स विकसित करने पर फोकस कर रहा है। कंपनी की वैल्यूएशन हाल ही में 500 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, लेकिन अभी तक लाभ कमाने में सफल नहीं हुई है। इस परियोजना से ओपनएआई को उम्मीद है कि वह अपनी तकनीक को अधिक व्यावसायिक रूप से उपयोगी बना सकेगी।
प्रोजेक्ट मर्क्यूरी का उद्देश्य और कार्यक्षेत्र:
प्रोजेक्ट मर्क्यूरी का कोडनेम रखा गया है, जो पौराणिक देवता मर्क्यूरी से प्रेरित है, जो गति और व्यापार का प्रतीक है। इस परियोजना के तहत ओपनएआई एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित कर रहा है ताकि वे जटिल वित्तीय मॉडलिंग कर सकें। विशेष रूप से, यह उन कार्यों पर फोकस कर रहा है जो निवेश बैंकिंग में एंट्री-लेवल एनालिस्ट्स द्वारा किए जाते हैं, जैसे आईपीओ (आरंभिक सार्वजनिक पेशकश), पुनर्गठन, लीवरेज्ड बायआउट्स और मर्जर्स से जुड़े मॉडल बनाना। ये कार्य आमतौर पर एक्सेल शीट्स पर आधारित होते हैं और जूनियर बैंकरों को 80 घंटे से अधिक काम करने पर मजबूर करते हैं। ओपनएआई का लक्ष्य इन दोहराव वाले कार्यों को स्वचालित करना है, जिससे सीनियर कर्मचारियों को अधिक रणनीतिक कामों पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिले। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह परियोजना वॉल स्ट्रीट की ‘पीएलएस फिक्स’ संस्कृति को खत्म करने की दिशा में एक कदम है, जहां जूनियर कर्मचारी सीनियरों के अंतिम मिनट के बदलावों से परेशान रहते हैं। एआई इन कार्यों को तेज और सटीक तरीके से कर सकता है, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी लेकिन नौकरियों पर असर पड़ेगा।
पूर्व बैंकरों की भर्ती और उनकी भूमिका:
ओपनएआई ने इस परियोजना के लिए 100 से अधिक पूर्व निवेश बैंकरों को अनुबंध पर भर्ती किया है। ये कर्मचारी जेपी मॉर्गन चेज, मॉर्गन स्टैनली, गोल्डमैन सैक्स, ब्रुकफील्ड, मुबाडला, एवरकोर और केकेआर जैसी प्रमुख कंपनियों से आते हैं। इसके अलावा, हार्वर्ड और एमआईटी जैसे संस्थानों के एमबीए छात्रों को भी शामिल किया गया है। इन पूर्व बैंकरों को प्रति घंटा 150 डॉलर (लगभग 12,500 रुपये) का भुगतान किया जा रहा है। उनकी मुख्य भूमिका एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करना है, जिसमें प्रॉम्प्ट्स लिखना, मॉडल्स का परीक्षण करना और एआई द्वारा उत्पन्न आउटपुट पर फीडबैक देना शामिल है। सप्ताह में एक मॉडल सबमिट करने की आवश्यकता है, जिसके बाद फीडबैक मिलता है और सुधार कर उसे सिस्टम में शामिल किया जाता है। ये बैंकर एक्सेल का उपयोग करते हैं और इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स का पालन करते हैं, जैसे मार्जिन साइजिंग और प्रतिशतों को इटैलिक बनाना। भर्ती प्रक्रिया भी एआई आधारित है—रिज्यूमे पर आधारित 20 मिनट का चैटबॉट इंटरव्यू, उसके बाद फाइनेंशियल स्टेटमेंट टेस्ट और मॉडलिंग एक्सरसाइज। ओपनएआई के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ सहयोग करती है ताकि मॉडल्स की क्षमता को सुधारा जा सके, और ये विशेषज्ञ थर्ड-पार्टी सप्लायर्स द्वारा भर्ती, प्रबंधित और भुगतान किए जाते हैं।
एआई प्रशिक्षण की प्रक्रिया:
प्रशिक्षण में पूर्व बैंकरों की विशेषज्ञता का उपयोग किया जा रहा है ताकि एआई वित्तीय मॉडल्स को सही तरीके से समझ सके। ये मॉडल्स विभिन्न लेन-देन प्रकारों के लिए बनाए जा रहे हैं, जैसे मर्जर्स और बायआउट्स। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन इस परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं, ताकि एआई को फाइनेंस, कानून और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक बनाया जा सके। कॉन्ट्रैक्टर्स को विकसित हो रहे एआई टूल्स तक प्रारंभिक पहुंच मिलती है, जो जूनियर बैंकरों के मैनुअल कार्यों को दोहराते और सुधारते हैं। यह प्रक्रिया ओपनएआई के मॉडल्स को विभिन्न डोमेन में बेहतर बनाने में मदद कर रही है।
नौकरियों पर संभावित प्रभाव और व्यापक संदर्भ:
इस परियोजना से जूनियर बैंकरों में नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। निवेश बैंकिंग में एंट्री-लेवल एनालिस्ट्स अक्सर लंबे घंटों काम करते हैं, जो उनके लिए तनावपूर्ण होता है। एआई इन कार्यों को ऑटोमेट करने से जूनियर भूमिकाओं में कमी आ सकती है, लेकिन सीनियर स्तर पर अधिक रणनीतिक अवसर पैदा हो सकते हैं। कई स्टार्टअप पहले से ही ऐसे एआई सॉल्यूशंस ऑफर कर रहे हैं, जो इस ट्रेंड को बढ़ावा दे रहे हैं। ओपनएआई की यह पहल फाइनेंस इंडस्ट्री को बदल सकती है, जहां दोहराव वाले डेटा कार्यों पर निर्भरता ज्यादा है। हालांकि, कंपनी अभी लाभ नहीं कमा रही है, इसलिए इस परियोजना से व्यावसायिक सफलता की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई वित्तीय मॉडलिंग को तेज और सटीक बनाएगा, लेकिन मानवीय विशेषज्ञता की जगह पूरी तरह नहीं ले सकेगा।
भारत और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रभाव:
भारत में, जहां बैंकिंग सेक्टर तेजी से डिजिटाइज हो रहा है, यह परियोजना आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और एसबीआई जैसे बैंकों के लिए प्रासंगिक हो सकती है। यहां एंट्री-लेवल जॉब्स में ऑटोमेशन से युवा कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है, लेकिन साथ ही स्किल डेवलपमेंट की नई संभावनाएं खुलेंगी। वैश्विक स्तर पर, यह परियोजना ओपनएआई की रणनीति का हिस्सा है, जो चैटजीपीटी के बाद व्यावसायिक एआई को बढ़ावा दे रही है। आने वाले वर्षों में, फाइनेंस, लॉ और कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में ऐसी परियोजनाएं बढ़ सकती हैं। ओपनएआई का यह कदम एआई को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो नौकरियों के भविष्य पर बहस छेड़ रहा है।
यह परियोजना दर्शाती है कि एआई अब केवल चैटबॉट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावसायिक दुनिया को बदलने की क्षमता रखता है। हालांकि, नैतिक और रोजगार संबंधी मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी होगा।
