Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

मौसमी बदलाव—जैसे गर्मी से सर्दी, बरसात से शरद, या सर्दी से वसंत—अक्सर हमारे स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। सर्दी, खांसी, फ्लू, और एलर्जी जैसी समस्याएं इन महीनों में बढ़ जाती हैं। लेकिन ऐसा क्यों होता है? क्या यह सिर्फ तापमान का खेल है, या इसके पीछे और भी जटिल कारण हैं? वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, मौसमी बदलावों का हमारे शरीर, पर्यावरण और प्रतिरक्षा प्रणाली पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जो हमें बीमारियों की चपेट में ला सकता है। यह लेख इन कारणों को विस्तार से समझाता है और बचाव के उपाय सुझाता है।

  1. शारीरिक रक्षा तंत्र पर असर: मौसम बदलने से हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यून सिस्टम) कमजोर हो सकती है। सर्दियों में धूप कम मिलने से विटामिन डी की कमी होती है, जो हमारी रक्षा कोशिकाओं को मजबूत रखता है। भारत में 70% लोग पहले से ही विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं, और सर्दी इसे और बढ़ा देती है। ठंड में खून की नलियां सिकुड़ती हैं, जिससे रक्त प्रवाह धीमा होता है और रक्षा कोशिकाएं कम सक्रिय हो पाती हैं। जब मौसम अचानक गर्म से ठंडा या ठंडा से गर्म होता है, तो शरीर को इस बदलाव के साथ तालमेल बिठाने में समय लगता है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से हमला कर देते हैं।
  2. वायरस और बैक्टीरिया का बढ़ता खतरा: मौसमी बदलाव, खासकर सर्दी और मानसून में, वायरस और बैक्टीरिया को पनपने का मौका देते हैं। सर्दी-जुकाम पैदा करने वाला राइनोवायरस और फ्लू वायरस ठंडे, सूखे मौसम में ज्यादा समय तक हवा में रहते हैं। एक शोध के मुताबिक, 40% से कम नमी में ये वायरस हवा में तैरते रहते हैं और आसानी से फैलते हैं। मानसून में गीलेपन से फंगस और बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जो त्वचा और सांस की बीमारियों का कारण बनते हैं। नेशनल हेल्थ मिशन की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बरसात में 30% अधिक सांस के रोग और 25% त्वचा संक्रमण के मामले बढ़ते हैं।
  3. एलर्जी का बढ़ता जोखिम: मौसम बदलने के साथ हवा में पराग (पॉलन), धूल और मोल्ड जैसे एलर्जी पैदा करने वाले तत्व बढ़ जाते हैं। वसंत और शरद में पेड़-पौधों से पराग का उत्सर्जन ज्यादा होता है, जिससे नाक बहना, छींकें और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में सर्दियों में स्मॉग और प्रदूषण इसे और बदतर बनाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में 15% सांस की बीमारियां मौसमी एलर्जी और प्रदूषण से जुड़ी हैं।
  4. जीवनशैली में बदलाव: मौसम के साथ हमारी दिनचर्या भी बदलती है। सर्दियों में लोग घरों में ज्यादा रहते हैं, जहां हवा का प्रवाह कम होता है, जिससे वायरस आसानी से फैलते हैं। बरसात में गीले कपड़े और नम माहौल त्वचा के रोगों को बढ़ाता है। दीवाली जैसे त्योहारों में अनियमित खाना और कम नींद रक्षा तंत्र को कमजोर करती है। भारत में अक्टूबर-नवंबर में 40% लोग मौसमी बीमारियों का शिकार होते हैं, क्योंकि सामाजिक आयोजनों और बाहर की गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
  5. तापमान और नमी का असर: तापमान और नमी में बदलाव हमारे सांस के रास्तों को संवेदनशील बनाता है। ठंड में नाक और गले की भीतरी परत सूख जाती है, जो वायरस का प्रवेश आसान बनाती है। बरसात में ज्यादा नमी मोल्ड और बैक्टीरिया को बढ़ावा देती है। शोध बताते हैं कि 20-25 डिग्री तापमान और 50-60% नमी में वायरस सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।
  6. खास समूहों पर प्रभाव: बच्चे और बुजुर्ग मौसमी बदलावों से ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा कमजोर होती है। भारत में, 5 साल से छोटे 30% बच्चे सर्दियों में सांस के रोगों से जूझते हैं, और बुजुर्गों में फ्लू और निमोनिया 20% तक बढ़ जाता है। अस्थमा या थैलेसीमिया जैसे रोगों वाले लोग और भी जोखिम में रहते हैं।

बचाव के उपाय: स्वस्थ रहने की कुंजी

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं: विटामिन डी की गोलियां (डॉक्टर की सलाह से) और विटामिन सी युक्त खाद्य जैसे नींबू, संतरा और आंवला लें। रोज व्यायाम करें और 7-8 घंटे सोएं।
  • स्वच्छता: बाहर से आने पर हाथ धोएं। प्रदूषित जगहों पर मास्क पहनें।
  • एलर्जी से बचाव: घर में ह्यूमिडिफायर या एयर प्यूरिफायर लगाएं। बिस्तर और कपड़े नियमित धोएं।
  • पानी और पोषण: खूब पानी पिएं। काढ़ा, सूप और हर्बल चाय लें। मौसमी फल-सब्जियां खाएं।
  • चिकित्सा: फ्लू वैक्सीन लें। बुखार, खांसी या त्वचा की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • जागरूकता: मौसम के हिसाब से स्वास्थ्य अलर्ट फॉलो करें। राष्ट्रीय हेल्थ हेल्पलाइन 108 पर संपर्क करें।

सतर्कता से जीतें:
मौसमी बदलाव बीमारियों को न्योता दे सकते हैं, लेकिन सही सावधानी और जानकारी से इनसे बचा जा सकता है। भारत जैसे देश में, जहां मौसम और प्रदूषण चुनौतियां बढ़ाते हैं, स्वच्छता, पोषण और समय पर इलाज जरूरी है। मौसमी बीमारियों से डरने की बजाय, इन्हें समझें और स्वस्थ रहें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× Whatsapp