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by-Ravindra Sikarwar

दुनिया भर में दिल का दौरा (हार्ट अटैक) एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है, जो अक्सर अचानक आता है और अगर समय पर इलाज न हो तो घातक साबित हो सकता है। विशेष रूप से जब व्यक्ति अकेला होता है, तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है क्योंकि सहायता प्राप्त करने में देरी हो सकती है। हालांकि, सही जानकारी और त्वरित कार्रवाई से जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यह लेख विश्वसनीय स्रोतों जैसे जॉन्स हॉपकिंस, ड्यूक हेल्थ और हेल्थलाइन से प्राप्त जानकारी पर आधारित है, जिसमें दिल के दौरे के लक्षण, जोखिम कारक, अकेले होने पर अपनाए जाने वाले कदम, मिथक और रोकथाम के तरीके शामिल हैं। मुख्य जोर इस बात पर है कि लक्षण दिखते ही आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें, क्योंकि पहले घंटे में इलाज शुरू होना महत्वपूर्ण है।

दिल के दौरे के लक्षण:
दिल का दौरा तब होता है जब हृदय की धमनियों में रुकावट आ जाती है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और हृदय की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। मुख्य लक्षण छाती में असुविधा है, जो केंद्र में होती है और भारीपन, जकड़न, दबाव, जलन, सुन्नता या निचोड़ने जैसी महसूस होती है। यह दर्द कई मिनट तक रह सकता है, दूर हो सकता है या फिर लौट सकता है। अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • ऊपरी शरीर में दर्द, जैसे बाजुओं, बाएं कंधे, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट में।
  • सांस लेने में तकलीफ या हांफना।
  • पसीना आना या ठंडा पसीना।
  • पेट भरा हुआ महसूस होना, अपच या घुटन जैसा अनुभव।
  • मतली या उल्टी।
  • चक्कर आना, बेहोशी जैसा महसूस या अचानक कमजोरी।
  • अस्पष्ट थकान या चिंता।
  • तेज या अनियमित दिल की धड़कन।

महिलाओं, बुजुर्गों और मधुमेह रोगियों में लक्षण कम स्पष्ट हो सकते हैं, जैसे सिर्फ सांस फूलना या मतली। अगर ये लक्षण अचानक शुरू हों, तो उन्हें नजरअंदाज न करें।

जोखिम कारक:
कुछ कारक दिल के दौरे की संभावना बढ़ाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • उम्र: पुरुषों में 45 वर्ष से अधिक और महिलाओं में 55 वर्ष से अधिक।
  • धूम्रपान या तंबाकू का उपयोग।
  • उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल या उच्च ट्राइग्लिसराइड स्तर।
  • मधुमेह, मोटापा और तनाव।
  • परिवार में दिल के दौरे का इतिहास।
  • शारीरिक निष्क्रियता।
  • अवैध दवाओं का सेवन।
  • गर्भावस्था में प्रीक्लेम्पसिया का इतिहास या स्व-प्रतिरक्षी रोग जैसे रुमेटॉइड आर्थराइटिस या ल्यूपस।

ये कारक नियंत्रित किए जा सकते हैं, इसलिए नियमित चिकित्सा जांच आवश्यक है।

अकेले होने पर अपनाए जाने वाले कदम:
अगर आप अकेले हैं और लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत कार्रवाई करें। मुख्य उद्देश्य हृदय की क्षति को कम करना और पेशेवर मदद प्राप्त करना है। निम्नलिखित क्रम में कदम उठाएं:

  1. आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें: सबसे पहले 911 (या अपने देश की आपातकालीन संख्या) डायल करें। यह सबसे तेज तरीका है मदद पाने का। दूरदराज के इलाकों में भी डिस्पैचर निर्देश दे सकते हैं। किसी और को कॉल करने से पहले यह करें, क्योंकि पैरामेडिक्स ईकेजी कर रुकावट की जांच कर सकते हैं और आपको उपयुक्त अस्पताल ले जा सकते हैं।
  2. पास के किसी व्यक्ति से संपर्क करें: 911 कॉल के बाद, अगर संभव हो तो पड़ोसी या रिश्तेदार को बुलाएं ताकि वे आ सकें। अगर आप बेहोश हो जाते हैं, तो उनकी मौजूदगी मददगार हो सकती है। लेकिन परिवहन के लिए उन पर निर्भर न रहें—पैरामेडिक्स का इंतजार करें।
  3. एस्पिरिन चबाकर निगलें: अगर आपको एस्पिरिन से एलर्जी नहीं है, डॉक्टर ने मना नहीं किया है और यह अन्य दवाओं से टकराव नहीं पैदा करता, तो एक 325 मिलीग्राम एस्पिरिन या दो 81 मिलीग्राम बेबी एस्पिरिन चबाकर निगलें। लक्षण शुरू होने के 30 मिनट के अंदर यह करें। चबाने से दवा तेजी से रक्त में घुलती है और थक्के बनने को रोकती है।
  4. खुद ड्राइव न करें: अगर ड्राइविंग के दौरान लक्षण शुरू हों, तो सुरक्षित जगह पर रुकें। बेहोशी की स्थिति में खुद और दूसरों को खतरे में न डालें।
  5. शांत रहें और आराम करें: घबराहट से दिल की धड़कन बढ़ सकती है, इसलिए शांत रहें। धीमी गिनती (जैसे एक-एक हजार, दो-एक हजार) से दिल की गति नियंत्रित करें।
  6. लेटें और पैर ऊपर उठाएं: पीठ के बल लेटें और पैरों को तकिए या कुर्सी पर रखकर ऊंचा करें। इससे डायफ्राम खुलता है, सांस लेना आसान होता है और रक्त में ऑक्सीजन बढ़ता है। अगर चक्कर आए, तो किसी स्थिर वस्तु पर ध्यान केंद्रित करें।
  7. धीमी और गहरी सांस लें: तेज सांस न लें; ताजी हवा में गहरी सांस लें। खिड़की, दरवाजा या पंखा खोलें ताकि ऑक्सीजन की आपूर्ति बनी रहे।
  8. दरवाजा अनलॉक करें: मुख्य दरवाजा खोलकर रखें ताकि पैरामेडिक्स आसानी से प्रवेश कर सकें।
  9. खाना-पीना टालें: एस्पिरिन के अलावा कुछ न लें, क्योंकि इससे इलाज जटिल हो सकता है।

दिल का दौरा और कार्डियक अरेस्ट में अंतर:
दिल का दौरा धमनी की रुकावट से होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की धड़कन रुक जाती है, जिससे व्यक्ति बेहोश हो जाता है। अगर अकेले कार्डियक अरेस्ट हो, तो 911 कॉल करें और अगर उपलब्ध हो तो एईडी (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) का उपयोग करें।

आम मिथक:

  • कफ सीपीआर: जोरदार खांसने से दिल की लय ठीक करने का दावा गलत है। यह काम नहीं करता और ऑक्सीजन की कमी बढ़ा सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन इसे अनुशंसित नहीं करता।
  • मिर्च वाला पानी: कैयेन मिर्च के साथ पानी पीने से दिल का दौरा रुकने का कोई प्रमाण नहीं है और यह एस्पिरिन से टकराव पैदा कर सकता है।

बचाव के बाद की सलाह:
अगर आप बच जाते हैं, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। पिछला दौरा दोबारा होने का जोखिम बढ़ाता है। डॉक्टर नाइट्रोग्लिसरीन (रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने के लिए), बीटा-ब्लॉकर्स (तनाव हार्मोन को ब्लॉक करने के लिए) या रक्त पतला करने वाली दवाएं लिख सकते हैं। जीवनशैली बदलें: स्वस्थ आहार, व्यायाम, नींद और कार्डियक रिहैब प्रोग्राम अपनाएं।

रोकथाम के तरीके:
दिल के दौरे को रोकने के लिए:

  • धूम्रपान छोड़ें और सेकंडहैंड स्मोक से बचें।
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को नियंत्रित करें (आहार, वजन कम करना, दवाएं)।
  • रोजाना शारीरिक गतिविधि करें।
  • मोटापा नियंत्रित करें।
  • मधुमेह होने पर रक्त शर्करा प्रबंधित करें।
  • तनाव कम करने के लिए योग या गहरी सांस लें।
  • शराब सीमित रखें।
  • विटामिन और मिनरल से भरपूर संतुलित आहार लें।

अनियंत्रित कारक जैसे उम्र, लिंग और आनुवंशिकता को ध्यान में रखते हुए नियमित जांच कराएं।

यह जानकारी जीवन बचाने में मदद कर सकती है, लेकिन चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। अगर लक्षण दिखें, तो तुरंत मदद लें। समय पर कार्रवाई से 90 मिनट के अंदर धमनी खोलकर हृदय की क्षति रोकी जा सकती है।

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