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by-Ravindra Sikarwar

डिजिटल युग में डेटिंग एक जटिल खेल बन चुकी है, जहां कैटफिशिंग, घोस्टिंग और ब्रेडक्रंबिंग जैसे पुराने खतरे तो हैं ही, अब एक नया शब्द जोड़ा गया है: बायो-बेटिंग। यह ट्रेंड डेटिंग प्रोफाइल के ‘बायो’ यानी संक्षिप्त विवरण को हथियार बनाकर लोगों को लुभाने का तरीका है। इसमें व्यक्ति अपनी प्रोफाइल में खुद को अतिरंजित रूप से पेश करता है—जैसे साहसिक यात्राओं का शौकीन बताना, जबकि हकीकत में वो कभी-किराए पर बाइक लेकर घूमता हो। या फिर ‘पढ़ने का दीवाना’ लिखना, लेकिन अलमारी में सिर्फ पुरानी मैगजीनें हों। यह झूठ नहीं, बल्कि आकर्षक बनाने की चाल है, जो मिलने पर हकीकत से टकराकर निराशा पैदा करती है।

विस्प डेटिंग ऐप की विशेषज्ञ सिल्विया लिंजालोन के अनुसार, यह प्रथा ऐप थकान का प्रमुख कारण बन रही है। “प्रोफाइल से मेल खाने वाले व्यक्ति से मिलने पर जो उम्मीद टूटती है, वो विश्वास को चोट पहुंचाती है और पूरा प्रोसेस बनावटी लगने लगता है।” एक हालिया सर्वे में 63% यूजर्स ने माना कि रीयल मीटिंग के बाद प्रोफाइल से मेल न खाने पर उन्हें धोखा महसूस हुआ। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि यह ट्रेंड युवाओं में ऑनलाइन कनेक्शन पर संदेह बढ़ा रहा है, खासकर जब टिंडर, बंबल या हिंग जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हर तीसरी प्रोफाइल अतिशयोक्ति से भरी हो।

यह कैटफिशिंग से अलग है, जहां पूरी पहचान ही नकली होती है। बायो-बेटिंग सूक्ष्म है—फोटो एडिटिंग या नौकरी का ओवरस्टेटमेंट शामिल हो सकता है। उदाहरणस्वरूप, कोई कहे ‘वीकेंड पर कुकिंग क्लास लेता हूं’, लेकिन असल में सिर्फ इंस्टेंट नूडल्स बनाता हो। इससे पहली डेट पर अजीब मौन छा जाता है, और लोग ऐप्स से दूर भागने लगते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह लंबे रिश्तों को तोड़ता है, क्योंकि सच्चे बंधन पारदर्शिता पर टिकते हैं, न कि कल्पना पर।

बायो-बेटिंग की पहचान कैसे करें?

  • अस्पष्ट दावे: ‘ट्रैवलर’ या ‘फिटनेस फ्रीक’ जैसे सामान्य शब्दों पर शक करें। विशिष्ट विवरण जैसे ‘अगले महीने हिमालय ट्रेक’ ज्यादा विश्वसनीय होते हैं।
  • ओवर-द-टॉप हॉबीज: अगर बायो में ढेर सारी गतिविधियां हों, लेकिन चैट में उन पर बात न बने, तो सावधान।
  • फोटो vs रीयलिटी: प्रोफाइल तस्वीरें आइडियल लगें, लेकिन वीडियो कॉल पर फर्क दिखे।
  • जल्दी मीटिंग: हफ्तों चैट करने से बचें; जल्दी आमने-सामने आना हकीकत जांचने का बेहतर तरीका।

इससे बचने के टिप्स:

  • अपनी प्रोफाइल में ईमानदार रहें—सच्चाई ही आकर्षण बढ़ाती है।
  • सवाल पूछें: बायो के दावों पर गहराई से बात करें, जैसे ‘तुम्हारी आखिरी ट्रिप कहां थी?’
  • अगर धोखा लगे, तो ब्लॉक करें और आगे बढ़ें; ऐसी ऐप्स पर रिपोर्ट फीचर का इस्तेमाल करें।
  • याद रखें: सच्चा साथी वो है जो आपकी कमियों को भी अपनाए, न कि दिखावे को।

यह ट्रेंड सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां जेन जेड इसे ‘टॉक्सिक डेटिंग कल्चर’ का हिस्सा बता रही है। अंत में, डेटिंग ऐप्स को मजेदार रखने के लिए पारदर्शिता ही कुंजी है—वरना ये थकान का सबब बन जाएंगे।

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