Vrindavan: ऐतिहासिक पहल से खुला विकास का मार्ग, वृंदावन में हुई पहली भूमि रजिस्ट्री
वृंदावन में ठाकुर श्री बांके बिहारी के भक्तों के लिए शुक्रवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। भव्य श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में पहला ठोस कदम उठाते हुए भूमि की पहली रजिस्ट्री पूरी की गई। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी और जिला प्रशासन की पहल से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का रास्ता साफ हुआ है।
Vrindavan: उच्चस्तरीय समिति की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार गठित इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार कर रहे हैं।
समिति में प्रशासन, पुलिस, पुरातत्व विभाग के अधिकारी और गोस्वामी समाज के प्रतिनिधि शामिल हैं।
मंदिर के गोस्वामियों, सेवायतों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों के साथ लगातार संवाद कर उनकी राय को योजना में शामिल किया गया है।
Vrindavan:परंपरा के साथ आधुनिक सुविधाओं का समन्वय
प्रस्तावित कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वृंदावन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत बनी रहे।
इसके साथ ही आधुनिक जरूरतों को भी पूरा किया जा सके।
यह परियोजना न केवल धार्मिक आस्था का सम्मान करेगी, बल्कि शहर की आधारभूत संरचना को भी मजबूत बनाएगी।
पर्यटन, रोजगार और सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
कॉरिडोर के निर्माण से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
जिससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।
इसके साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं को संकरी गलियों की परेशानी से राहत मिलेगी और ठाकुर जी के दर्शन अधिक सुरक्षित व सुगम हो जाएंगे।
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