by-Ravindra Sikarwar
उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में शुक्रवार की नमाज के बाद ‘आई लव मुहम्मद’ अभियान के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान भारी हिंसा भड़क उठी। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान को उत्तेजक भाषणों के आरोप में हिरासत में ले लिया गया है, जबकि पुलिस ने पथराव करने वाली भीड़ पर लाठीचार्ज किया। इस घटना में कम से कम 10 पुलिसकर्मी घायल हुए, और 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। शहर के श्यामगंज बाजार जैसे इलाकों में दुकानें बंद हो गईं, और स्थानीय प्रशासन ने भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया। यह विवाद कानपुर से शुरू होकर अब यूपी के कई जिलों में फैल चुका है, जो धार्मिक संवेदनशीलता और सामाजिक तनाव को उजागर कर रहा है।
विवाद की पृष्ठभूमि: कानपुर से बरेली तक का सफर
‘आई लव मुहम्मद’ अभियान की शुरुआत 4 सितंबर, 2025 को बरावाफात जुलूस के दौरान कानपुर में हुई, जब सड़क पर “आई लव मुहम्मद” लिखे बोर्ड लगाए गए। 9 सितंबर को इस पर एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें नौ नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर सार्वजनिक स्थान पर अवैध रूप से पोस्टर लगाने का आरोप लगाया गया। मौलाना तौकीर रजा ने इसे पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों का जवाब बताते हुए समर्थन में प्रदर्शन का आह्वान किया। उन्होंने शाहजहांपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में पैगंबर के अपमान के उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि यह अभियान धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए है।
यह विवाद तेजी से फैला और बरेली, मऊ, बागपत, लखनऊ, कौशांबी, उन्नाव, काशीपुर, हैदराबाद, गुजरात के गांधीनगर और कर्नाटक तक पहुंच गया। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी कहा कि “आई लव मुहम्मद” कहना कोई अपराध नहीं है, जिससे बहस और तेज हो गई। बरेली, जो बरेलवी संप्रदाय का केंद्र है, यहां विशेष रूप से संवेदनशील हो गया, क्योंकि तौकीर रजा स्वयं अहमद रजा खान (बरेलवी संप्रदाय के संस्थापक) के वंशज हैं।
घटना का क्रम: नमाज के बाद भड़की आग
शुक्रवार को बरेली के इस्लामिया मैदान के निकट एक छोटे मस्जिद के बाहर और आला हज़रत दरगाह के आसपास सैकड़ों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए। मौलाना तौकीर रजा ने इस्लामिया ग्राउंड पर धरना देने का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन ने अनुमति न देने पर इसे स्थगित करने की घोषणा की। इससे नाराज प्रदर्शनकारियों ने रजा के घर के बाहर “आई लव मुहम्मद” के प्लेकार्ड लिए इकट्ठा हो गए और नारे लगाने लगे।
पुलिस ने फ्लैग मार्च किया और लोगों को नमाज के बाद घर लौटने की सलाह दी, लेकिन स्थिति बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, कुछ ने वाहनों में तोड़फोड़ की, और यहां तक कि हवाई फायरिंग की भी खबरें आईं। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लिया, जिससे भीड़ इधर-उधर भागी। शहर के कोतवाली क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई, और स्थानीय दुकानदारों ने बाजार बंद कर दिया। सीसीटीवी फुटेज से शेष उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।
तौकीर रजा की हिरासत: उत्तेजक भाषणों का आरोप
मौलाना तौकीर रजा को हिंसा का मुख्य सूत्रधार बताते हुए पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। वे बरादरी क्षेत्र के एक निजी आवास पर कड़े पहरे में रखे गए हैं, हालांकि अधिकारियों ने इसे औपचारिक गिरफ्तारी नहीं बताया। रजा ने प्रदर्शन स्थगित करने की खबरों को “झूठा” करार देते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें कहा, “यह पुलिस और प्रशासन की साजिश है। मैं अपने मूल ऐलान पर कायम रहूंगा।” पुलिस का कहना है कि रजा के वीडियो देखकर स्थानीय लोग भड़के, और उनके भाषणों ने हिंसा भड़काई।
तौकीर रजा पिछले दो दशकों से राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और बरेली व आसपास के जिलों में प्रभाव रखते हैं। वे 2010 के बरेली दंगों के आरोपी भी हैं, जिसका मामला अदालत में लंबित है। पुलिस ने कहा कि पांच दिनों की साजिश रचकर हिंसा की गई, और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लगाने पर विचार किया जा रहा है। अब तक 30 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 50 से अधिक पूछताछ के लिए हिरासत में हैं।
पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा उपाय: घायल पुलिसकर्मी व बाजार बंद
बरेली के आईजी अजय साहनी ने बताया कि फ्लैग मार्च के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने नारे लगाए और पथराव किया। पुलिस ने हथियार बरामद किए हैं, और तीन-चार थानों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। 10 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें से कुछ को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। डीआईजी अजय कुमार ने कहा कि गिरफ्तार लोग मस्जिद के आसपास के निवासी हैं, और सीसीटीवी से बाकियों की तलाश की जा रही है।
प्रशासन ने ड्रोन निगरानी शुरू की है, और प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य ने शांति बनाए रखने की अपील की। दुकानदारों को सुरक्षा का आश्वासन देकर बाजार फिर से खोले गए, लेकिन तनाव बरकरार है। मऊ में भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान पथराव हुआ, जहां पुलिस ने सख्ती बरती।
प्रतिक्रियाएं और व्यापक प्रभाव: धार्मिक तनाव की चेतावनी
इस घटना ने धार्मिक संवेदनशीलता पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय नेताओं ने शांति की अपील की, जबकि कुछ संगठनों ने अभियान को समर्थन दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने आग में घी डाला। गुजरात के गांधीनगर में भी इसी तरह के एक सोशल मीडिया पोस्ट पर दंगे भड़के, जहां 60 लोगों को हिरासत में लिया गया। यह घटना यूपी सरकार के लिए चुनौती बन गई है, जो सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के प्रयासों में जुटी है।
बरेली की यह हिंसा न केवल स्थानीय स्तर पर दहशत फैला रही है, बल्कि पूरे देश में धार्मिक ध्रुवीकरण की आशंका पैदा कर रही है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि कानून-व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी, और शांति बहाली के लिए निरंतर निगरानी जारी रहेगी। यह घटना हमें याद दिलाती है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए संवाद ही समाधान का रास्ता है।
