by-Ravindra Sikarwar
अमेरिका ने कुछ भारतीय वस्तुओं पर 50% का भारी टैरिफ़ लगाया है, जिसने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इस कदम का उद्देश्य भारत पर आर्थिक दबाव बनाना बताया जा रहा है। भारत सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए एक बहु-आयामी रणनीति तैयार कर रही है।
ट्रंप के दावे और भारत की प्रतिक्रिया:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि उन्होंने इस टैरिफ़ की धमकी का इस्तेमाल भारत को पाकिस्तान के साथ तनाव कम करने के लिए दबाव डालने के लिए किया। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की और चेतावनी दी कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव जारी रहा तो टैरिफ़ इतना ज़्यादा होगा कि “आपका सिर घूम जाएगा।” उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध टल गया।
हालांकि, भारत ने ट्रम्प के इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली ने साफ किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह के तनाव को कम करने में किसी तीसरे पक्ष का कोई हस्तक्षेप नहीं था। भारत ने इस कदम को “अनुचित और अनुचित” बताया है और कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
टैरिफ़ का कारण और भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
अमेरिका ने यह टैरिफ़ भारत द्वारा रूस से तेल और रक्षा उपकरण खरीदने को लेकर लगाया है। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो और अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने आरोप लगाया है कि भारत अपने तेल आयात के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन में रूस के युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है।
इस टैरिफ़ से भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्र प्रभावित होंगे, जिनमें कपड़ा, रत्न और आभूषण, समुद्री उत्पाद, और चमड़ा उद्योग शामिल हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, लगभग 60.2 बिलियन डॉलर मूल्य के भारतीय सामानों पर 50% का टैरिफ़ लगेगा। इससे इन क्षेत्रों में निर्यात में 70% तक की गिरावट आ सकती है, जिससे लाखों नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं।
भारत सरकार की रणनीति:
टैरिफ़ के झटके को कम करने के लिए, भारत सरकार कई उपाय कर रही है:
- निर्यातकों को वित्तीय सहायता: सरकार टैरिफ़ से प्रभावित निर्यातकों को वित्तीय सहायता और सहायता प्रदान करने की योजना बना रही है।
- बाजार विविधीकरण: भारत चीन, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व जैसे नए बाजारों में निर्यात बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- घरेलू खपत बढ़ाना: सरकार जीएसटी दरों में कटौती करके और “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों को बढ़ावा देकर घरेलू खपत को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।
- आरबीआई का समर्थन: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि वह टैरिफ़ से प्रभावित क्षेत्रों को विशेष सहायता प्रदान करेगा और अर्थव्यवस्था पर समग्र प्रभाव को कम करने के लिए तैयार है।
- मुद्रास्फीति और जीडीपी पर प्रभाव: अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इन टैरिफ़ से वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी वृद्धि में 0.4-0.5% की कमी आ सकती है।
कुल मिलाकर, भारत इस आर्थिक चुनौती का सामना करने के लिए कमर कस रहा है और इसे गहरे आर्थिक सुधारों और व्यापारिक संबंधों को विविधीकृत करने के अवसर के रूप में देख रहा है।
