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धांधली, फर्जी प्रश्नपत्र और नकल माफिया की पुष्टि के बाद परीक्षा निरस्त, जल्द दोबारा आयोजन के निर्देश

By: Ravindra Sikarwar

Lucknow news: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फैसले के तहत यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया है। यह निर्णय स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद लिया गया, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के प्रमाण मिले हैं।

अप्रैल 2025 में हुई थी परीक्षा

UPESSC ने एडेड डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1253 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अप्रैल 2025 में लिखित परीक्षा आयोजित कराई थी। इनमें से 910 पदों के लिए 16 और 17 अप्रैल को परीक्षा हुई, जिसमें लगभग 82 हजार अभ्यर्थियों ने भाग लिया था।

STF जांच में उजागर हुई बड़ी गड़बड़ी

परीक्षा के बाद बड़े पैमाने पर नकल, पेपर लीक और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आईं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर STF ने गोपनीय जांच शुरू की। जांच में फर्जी प्रश्नपत्र तैयार करने, अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने और भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले गिरोह की सक्रियता सामने आई।

मुख्य आरोपी से जुड़े आयोग के शीर्ष अधिकारी

STF जांच में यह खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी महबूब अली, आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। इसी कारण चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आयोग अध्यक्ष से इस्तीफा भी लिया गया।

पूछताछ में कबूली साजिश

STF की पूछताछ में महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने माडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र हासिल किए और उन्हें पैसे लेकर अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया। मोबाइल डेटा एनालिसिस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से इन आरोपों की पुष्टि हुई है। जांच में कई अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आए हैं।

गिरफ्तारी और कार्रवाई

20 अप्रैल को STF ने फर्जी प्रश्नपत्रों के जरिए ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों—महबूब अली, बैजनाथा पाल और विनय पाल—को गिरफ्तार किया। इसके बाद परीक्षा परिणाम और इंटरव्यू प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई।

अभ्यर्थियों के विरोध के बाद फैसला

जांच समिति की रिपोर्ट और STF की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आयोग के बाहर धरना-प्रदर्शन कर परीक्षा रद्द करने की मांग की थी, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया।

सीएम योगी का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आयोग को निर्देश दिए हैं कि नई परीक्षा पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता के साथ जल्द आयोजित की जाए।

योगी सरकार के इस फैसले को भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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